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Poisonous Calcium carbide used for artificial fruit ripening

Poisonous Calcium carbide used for artificial fruit ripening

Calcium carbide (कैल्शियम कार्बाइड) व कई ऐसे रसायन है जिनका उपयोग बाजारों में फल तथा सब्जियों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए किया जाता है. ऐसे रसायन खाद्य पदार्थों को अनुमान से कहीं अधिक विषाक्त बना देते हैं. किसी भी फल को खरीदने या खाने से पहले इन सवालों पर जरुर गौर करें…

  • क्या आपको पता है कृत्रिम रूप से फल कैसे पकता है?
  • आखिर कौन-कौन से रसायनों को उपयोग फलों को पकाने के लिए किया जाता है? 
  • ‘कैल्शियम कार्बाइड’ के बारे में जानना क्यों जरूरी हैं?

यदि आपको इन सवालों का उत्तर नहीं पता तो चलिए हम बतातें हैं कहीं आप बड़े और चमकदार फलों के आड़ में किसी स्वास्थ्यगत मुसीबत में तो नहीं फसने वाले हैं.

फल और स्वास्थ्य | Fruit and Health

ताजे फलों से हमें विटामिन और खनिजों भरपूर आपूर्ति होती है. कुछ विशेष तरह के विटामिन जैसे विटामिन सी और विटामिन ए की पूर्ति सिर्फ फलों द्वारा ही की जा सकती है. 

ऐसा देखा गया है कि जो लोग अपने दैनिक भोजन में फलों को सम्मिलित करते है उनमें आम तौर पर दूसरों के अपेक्षा रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक विकसित होती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस बात की पुष्टि की है कि एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रतिदिन पांच बार फलों और सब्जियों का सेवन करें.

हालाँकि, फलों से होने वाले स्वास्थ्य लाभ इस बात पर भी बहुत हद तक निर्भर करता है कि वह फल कैसा है अर्थात फल प्राकृतिक रूप से पका है या रसायनों का उपयोग करके पकाया गया है.

फलों का पकना शारीरिक, जैव रासायनिक और आणविक प्रक्रियाओं का एक संयोजन है जो फलों के रंग, मिठास की मात्रा, अम्लता, बनावट और सुगंध में परिवर्तन का कारण बनता है. 

सामान्य तौर पर, यह एक शारीरिक प्रक्रिया है जो फल को खाने योग्य, स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाती है. इसी परिपेक्ष में सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि फलों को पकने के आधार पर कितने वर्गों में बांटा गया है. 

पकने के आधार पर फलों का वर्गीकरण | Classification according to fruit ripening

क्लाईमेक्टेरिक फल | Climacteric fruit

इस वर्ग में ऐसे फलों को रखा गया है जो आमतौर पर पौधों में पूर्ण विकसित होने पर तुड़ाई कर दी जाती है और बड़े बाजारों या दूर शहरों में ले जाने और इनके भंडारण के दौरान इसे और अधिक पकने दिया जा सकता है. 

इस तरह ये फल पेड़ों में बल्कि तुड़ाई के बाद भण्डारण गृहों में पकाया जाता है. इनमें केलाअमरूदआम सेबनाशपातीखुबानीआड़ू और टमाटर शामिल हैं.

नॉन-क्लाईमेक्टेरिक फल | Non-Climacteric fruit

ये फल तुड़ाई के बाद नहीं बल्कि पेड़ों में ही पकते हैं. ऐसे फलों को पूर्ण परिपक्वता और स्वाद प्राप्त करने के बाद ही तुड़ाई करते है एवं सीधे बाजारों में भेज दिए जाते है. इनमें वर्ग में नींबूसंतराअंगूरचेरीअनानास और स्ट्रॉबेरी जैसे फल शामिल हैं।

कृत्रिम रूप से फलों को पकाने की आवश्यकता आखिर क्यों? | Why the need to artificially ripen fruits

  1. उपरोक्त बताये गए दो वर्गों में से क्लाईमेक्टेरिक फल को ही कृत्रिम रूप से पकाने की आवश्यकता होती है क्योंकि इन फलों की प्राकृतिक रूप से पकने में अधिक समय लगता और हमेशा इनके पकने का इंतजार करना संभव नही होता है और साथ ही रंग, स्वाद जैसे गुणवत्ता प्रभावित होती है.
  2. दूसरी ओर इन फलों को उपभोक्ताओं के स्वीकार्य तथा बिक्री योग्य बनाने के लिए कृत्रिम रूप से पकाया जाता है.
  3. विश्वस्तर पर मात्र एक शर्त पर कृत्रिम रूप से पकने वाले फल को मानव उपभोग के लिए सुरक्षित माना जाता है यदि फलों को पकाने के लिए सुरक्षित एजेंटों या रसायनों का उपयोग किया जाता है.

फल पकने के जैविक प्रक्रिया | The biological process during ripening fruit

अधिकांश फल एथिलीन नामक गैसीय यौगिक का स्वतः उत्पादन करते हैं जो फलों पकने की प्रक्रिया शुरू करता है. ऐसे फल जो पकने की प्रक्रिया मे होते है, उनमे इसका स्तर बहुत कम है. लेकिन जैसे-जैसे फल विकसित होते हैं, वे बड़ी मात्रा में एथिलीन रसायन का उत्पादन करते हैं. जिससे फलों की पकने की प्रक्रिया तेज होती हैं. फल पकने की इस अवस्था को “क्लाईमेक्टेरिक” कहते हैं.

कृत्रिम रासायनिक घटक | Chemical Agent

1. कैल्शियम कार्बाइड | Calcium Carbide

सब्जियों तथा फलों को कृत्रिम रूप से पकने के लिए कैल्शियम कार्बाइड (CaC2) का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है. Calcium carbide जब हाइड्रोलाइज्ड होता है, तो एसिटिलीन पैदा करता है, जो फलों के कृत्रिम पकने का कारण बनता है।

Calcium carbide

2. एथिलीन | Ethylene

एथिलीन की बहुत कम सांद्रता फल पकने की प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए पर्याप्त होती है. अनुमानित समय से पहले फलों को बेचने के लिए एथिलीन का उपयोग कृत्रिम रूप से सेब, केला, आम, पपीता, अनानास और अमरूद को पकाने के लिए किया जाता है.

3. एथेफान | Ethephon

  • एथेफॉन एक ऐसा घटक है जिसका उपयोग कृत्रिम रूप से फलों को पकाने के लिए किया जाता है. पकने के लिए कैल्शियम कार्बाइड से कम समय लेता है इसलिए एथेफॉन को बेहतर माना जाता है.

  • एथेफॉन से पकने वाले फलों का रंग प्राकृतिक रूप से पकने वाले फलों के रंगों की तुलना में अधिक अच्छे होते है. इसके अलावा कैल्शियम कार्बाइड से पके फलों की तुलना में अधिक दिनों तक (Self life) रह सकती है.

कैल्शियम कार्बाइड का वैज्ञानिक दृष्टिकोण | Scientifically Calcium Carbide is...

  • कई स्वास्थ्यगत समस्याओं से भरा हुआ है Calcium carbide. यह विघटन प्रकृति की होती है और कई  अध्ययनों से पता चला है कि यह विटामिन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की जैविक संरचना को तोड़ता है.

  • इसके अलावा, यह एसिटिलीन का उत्पादन करता है, जो एथिलीन का एक एनालॉग है अर्थात यह केवल फलों के त्वचा का रंग बदलता है और फल अंदर से कच्चा या अधपका ही रहता है.

  • साथ ही, औद्योगिक ग्रेड कैल्शियम कार्बाइड में अक्सर आर्सेनिक और फॉस्फोरस की अल्प मात्रा पाई जाती है, जो कि एक जहरीला रसायन हैं.

  • आर्सेनिक और फॉस्फोरस विषाक्तता के लक्षणों में उल्टी, दस्त के साथ रक्त, कमजोरी, छाती और पेट में जलन, प्यास, निगलने में समस्या, आंखों में जलन, आंखों की स्थायी क्षति, त्वचा, मुंह, नाक और गले पर अल्सर शामिल हैं.

  • अन्य लक्षणों में गले में खरास, खांसी, घरघराहट और सांस की तकलीफ भी शामिल है.

Calcium carbide

कैल्शियम कार्बाइड से फलों पर प्रभाव | Harmful effect of calcium carbide on fruits

  • कृत्रिम रूप से पके आम का सेवन पेट के रोगों का कारण बन सकता है. यह पेट में म्यूकोसल ऊतक को नुकसान पहुंचाता है और आंतों के कार्य को बाधित करता है. यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क में रहता है, तो वे पेप्टिक अल्सर से पीड़ित हो सकता हैं.

  • अध्ययनों के अनुसार, लंबे समय तक या निरंतर  कैल्शियम कार्बाइड का सेवन हाइपोक्सिया उत्पन्न करके न्यूरोलॉजिकल सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को भी प्रभावित कर सकता है.

  • यह सिरदर्द, चक्कर आना, अधिक नींद आने की समस्या, याददास्त का कमजोर होना, मस्तिक घात, पैरों और हाथों में सुन्नता, सामान्य कमजोरी, ठण्ड और नम त्वचा और निम्न रक्तचाप जैसे लक्षण दिखाई देता है. 
  • गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से बहुत सावधान रहने की जरूरत है और यथासंभव कृत्रिम रूप से पके फलों और सब्जियों का परहेज करना चाहिए.

कैल्शियम कार्बाइड उपयोग संबंधी क़ानूनी प्रावधान | Legal provision for calcium carbide uses

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम (PFA) अधिनियम, 1954 के तहत Calcium carbide पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसका उपयोग करने वाला कोई भी व्यक्ति 1,000 रुपये के जुर्माने के साथ तीन साल का कैद हो सकता है. हालांकि, इसे लागू करने के लिए कोई प्रभावी कार्य योजना तैयार नहीं की गई है.

इसी वजह से इसका उपयोग आज बिना किसी डर के भारतीय बाजारों में किया जा रहा है.

कैल्शियम_कार्बाइड

कृत्रिम रूप से पके फलों की पहचान | Identification of artificial ripen fruits

  • टमाटर, आम, पपीता जैसे फलों में उनकी त्वचा का रंग समान होगा जबकि प्राकृतिक रूप से पके फलों के रंगों में भिन्नता होगी.

  • इसी तरह केले के मामले में यदि फल पीले रंग का है और तना का रंग गहरा हरा, इसका मतलब है कि फल कृत्रिम रसायनों से पकाया गया है. 

  • ऐसे फलों का स्वाद भी कम होता है और इसमें शैल्फ-लाइफ कम होती है.

निष्कर्ष | Conclusion

कैल्शियम कार्बाइड जैसे कई रसायन है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अभिशाप की तरह ही है. इसका उपयोग खाने के चीजों के साथ करना उचित नही है. आज वैश्विक बाजार के दौड़ में विक्रेता सामान के गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ तो करता ही साथ में मनुष्यों के स्वास्थ्य को भी दरकिनार कर देता है.

खाद्य सुरक्षा के मानकों को ताक में रखकर खाद्य सामग्रियों में हानिकारक रसायनों का मिश्रण करना गैर क़ानूनी है और यह अपराध की श्रेणी में आता है. नीति निर्धारकों को इस सम्बन्ध में कड़े नियम लागू करना चाहिए.

क्रेता तथा उपभोक्ता दोनों की ही जिम्मेदारी है कि ऐसे मिलावटों व रसायनों के प्रति जागरूक रहे साथ ही ऐसे सामानों को खरीदने, बेचने तथा सेवन करने से बचें.

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