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Carolus Linnaeus: The Father of Taxonomy

Carolus Linnaeus: The Father of Taxonomy

Taxonomy के जनक महान Carolus Linnaeus [कैरोलस लिनिअस], जिसे कार्ल वॉन लिने या कार्ल लिनिअस के नाम से भी जाना जाता है, जीवों के नामकरण, रैंकिंग और वर्गीकरण के लिए एक ऐसी प्रणाली विकसित की, जो आज भी व्यापक तौर से उपयोग किया जाता है.

Carl Linnaeus Facts

कैरोलस लिनिअस का जन्म | Birth of Carolus Linnaeus

महान वैज्ञानिक Carolus Linnaeus का जन्म 23 मई सन् 1707 को दक्षिणी स्वीडन के राशाल्ट नामक जगह में हुआ था. बचपन से कार्ल लिनिअस को प्रकृति और पौधों के प्रति गहरा प्रेम और आकर्षण था.

कैरोलस लिनिअस की शिक्षा | Educational Profile of Carolus Linnaeus

सन् 1727 में University of Lund में चिकित्सकीय अध्ययन के लिए दाखिला लिया परन्तु लगभग एक साल बाद उन्हें स्वीडन के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय, उप्साला विश्वविद्यालय [University of Uppsala] में स्थानांतरित कर दिया.

उप्साला विश्वविद्यालय में उन्होंने अपना अधिकांश समय पौधों को इकट्ठा करने और उनका औषधीय अध्ययन करने में लगाया. उनके चिकित्सा पाठ्यक्रम में वनस्पतियों का औषधीय अध्ययन एक मुख्य विषय था और प्रत्येक डॉक्टर को औषधीय पौधों से प्राप्त दवाओं को तैयार करना और उनका परीक्षण करना अनिवार्य था.

रिसर्च उपलब्धियां | Achievements on Research

सन् 1735 में,  लिनिअस नीदरलैंड चले गये जहाँ हार्डविजक विश्वविद्यालय [University of Harderwijk] में अपनी चिकित्सा की डिग्री पूरी की. बाद में, उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए लीडेन विश्वविद्यालय [Leiden University] में दाखिला लिया और ठीक उसी वर्ष जीवित चीजों के वर्गीकरण [classification of living things] का पहला संस्करण ‘‘सिस्टेमा नेचुरे’ [Systema Naturae] प्रकाशित किया.


Carolus Linnaeus
Image Credit: www.wikipedia.org

लिनिअस युग | Linnaeus Era

लिनिअस, सन् 1738 में वापस स्वीडन लौट आए, जहाँ उन्होंने सन् 1741 में उप्साला में प्रोफेसरशिप से सम्मानित होने से पहले तक, मेडिसिन में प्रैक्टिस (सिफलिस के उपचार में विशेषज्ञ के रूप में) करते रहे साथ ही साथ स्टॉकहोम विश्वविद्यालय [Stockholm] में भी व्याख्यान देते थे.

उप्साला विश्वविद्यालय में प्रोफेसरशिप मिलने के बाद उन्होंने विश्वविद्यालय के वनस्पति उद्यान [Botanical garden] में अपने वर्गीकरण प्रणाली के अनुसार पौधों को व्यवस्थित किया. इसी दौरान स्वीडन के विभिन्न हिस्सों में भी तीन और अभियान ऐसे ही अभियान चलाये.

उनके रिसर्च और ज्ञान से प्रेरित होकर उनके कई छात्रों ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों जैसे ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, उत्तर-पूर्वी अमेरिकी उपनिवेश, जापान, दक्षिण अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व में अन्वेषण यात्राएं कीं और ज्ञान ज्ञान को प्रसारित किया.

अनुसन्धान उपलब्धि | Research achievement of Carolus Linnaeus

इसी बीच, Carolus Linnaeus ने अपने ‘सिस्टर्न नेचुरे’ [Systema Naturae] को संशोधित करना जारी रखा. अब यह एक बहुत बढ़ा रिसर्च बन गया था क्योंकि उनके छात्रों तथा यूरोपीय वनस्पतिशास्त्री के द्वारा विश्व के विभिन्न हिस्सों से पौधे और जानवरों के अधिक से अधिक नमूनों उनके पास भेजे जा रहे थे. जिससे प्राप्त नमूनों के अनुसार उनकी अवधारणाओं को संशोधित किया जाना आवश्यक हो गया था.

वह अपने रिसर्च से बेहद प्यार करते थे इसलिए सन् 1758 में उप्साला शहर के बाहर, हम्मार्बी [Hammarby] में जमींन खरीदी, जहां उन्होंने सन् 1761 में एक छोटा सा संग्रहालय बनाया और व्यक्तिगत रूप से संग्रह किये गए चीजों को रखा. उनके इस कार्य ने एक अलग नाम व पहचान दी, और वह कार्ल वॉन लिने [Carl von Linne] बन गए.

कैरोलस लिनिअस की मृत्यु | After Linnaeus Death

कैरोलस लिनिअस की मृत्यु सन् 1778 हुई उनके बेटे, जिसका नाम भी कार्ल था, ने उन्हें उप्साला में प्रोफेसर के रूप में कामयाबी दिलाई. लेकिन वह वनस्पति विज्ञानी के रूप में उल्लेखनीय साबित नहीं हुए.

ठीक पांच साल सन् 1783 को कार्ल का भी निधन हो गया और उनका कोई वारिस नही था. उनकी मां और बहनों ने इंग्लैंड के प्रसिद्ध ऊन व्यापारी और  वनस्पतिविद् सर  जेम्स एडवर्ड स्मिथ [Sir James Edward Smith] को उनके मृत्यु के बाद लिनिअस लाइब्रेरी, पांडुलिपियों और प्राकृतिक इतिहास के संग्रहों को बेच दिया.

सर जेम्स एडवर्ड स्मिथ में सन् 1788 में उन सभी ऐतिहासिक धरोहर के देखभाल करने के लिए लंदन की लिनियन सोसायटी की स्थापना की थी.


Image Credit: wikimedia.org

वर्गीकरण सिद्धांत | Carolus Linnaeus classification system

वर्गीकरण की लिनियन प्रणाली में जीवों का समूहन एक विशेष पदानुक्रम में होता है, जिसे टेक्सा (एकवचन में टैक्सन) कहा जाता है. टेक्सा का सीमाक्षेत्र जगत [Kingdom] से लेकर प्रजाति [Species] तक होता है.

चुकि जगत [Kingdom] सबसे बड़ा होता है इसलिए यह सबसे समावेशी समूह है. इसके अंतर्गत ऐसे जीवों को शामिल हैं किया जाता है जो केवल कुछ बुनियादी समानताएं साझा करते हैं, जैसे पौध जगत [Plant Kingdom] और पशु जगत [Animal Kingdom].

पदानुक्रम में प्रजाति [species] सबसे छोटी और सबसे विशिष्ट समूह होती है. इसमें केवल ऐसे जीव शामिल होते हैं जो एक जैसे संतान पैदा करते है. घनिष्ट रूप से संबंधित प्रजातियों को जीनस [genus] में एक साथ समूहीकृत किया जाता है.

लिनियन वर्गीकरण सिद्धांत में संशोधन | Main Revisions on Classification Theory

जैसा कि उपरोक्त उल्लेखित किया गया है कि उनके छात्रों द्वारा दिए गए स्पेसिमेन के आधार पर उन्होंने वर्गीकरण की प्रणाली में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जिसमें एक बड़ा बदलाव डोमेन नामक एक नए टैक्सन को शामिल किया गया.

डोमेन एक टैक्सन है जो जगत [Kingdom] की तुलना में बड़ा और समावेशी है. अब पृथ्वी पर जीवन तीन डोमेन: बैक्टीरिया [Bacteria], आर्किया [Archaea] और यूकेरीओटा [Eukaryota] में बंट चूका था. वर्गीकरण में इस संशोधन से अधिकांश जीवविज्ञानी पूर्णत: सहमत थे.

बैक्टीरिया और आर्किया domain में एकल-कोशिका [single-celled] वाले प्रोकैरियोट्स शामिल होते हैं. इसी तरह यूकेरियोटा में वह सभी यूकेरियोट्स शामिल होते हैं, जो एकल-कोशिका [single-celled] वाले प्रोटिस्ट से मनुष्यों तक होते हैं. इस डोमेन के अंतर्गत Animalia [जानवर], Plantae [पौधे], Fungi [कवक], और Protista [प्रोटिस्ट] kingdom शामिल हैं.

कैरोलस लिनिअस की महत्वपूर्ण पुस्तकें | Carolus Linnaeus books

कार्ल लिनिअस [Carolus Linnaeus] और उनके शोध छात्रों के साथ मिलकर कई पुस्तकें प्रकाशित की किन्तु उनकी दो पुस्तकें जो द्विपद नामकरण [binomial nomenclature] की सम्पूर्ण व्याख्या करते है (जैसा कि पूर्व में उल्लेखित किया गया है).

Species Plantarum (1753) और System Naturae (1758) यही दो पुस्तकें ही नामकरण के लिए नींव साबित हुई. और अभी भी इन दो पुस्तकों के मदद से पौधों और जानवरों के नामकरण किया जाता है.


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अन्य तथ्य | Other Facts

  • वह एकमात्र वनस्पतिशास्त्री है जिसे वर्तमान में किसी भी जीव के वैज्ञानिक नाम के बाद L. लिख कर रिफरेन्स दिया जाता है. पहले, Linn. लिखा जाता था.
  • स्वीडिश गद्य के बेहतरीन लेखकों में से एक थे लिनियस. उनकी यात्रा पत्रिकाओं में पौधों की ही नहीं, बल्कि उनकी रुचि की हर चीज पर पैथी नोट होते थे. उन्होंने केवल व्यक्तिगत रुचि से नहीं लिखा, बल्कि प्रबुद्ध वैज्ञानिक और राजनीतिक जनता के लिए एक संवाददाता के रूप में लिखा.
  • उस समय लिनियस ही एकमात्र ऐसे वनस्पतिक वैज्ञानिक थे जिन्होंने क्रोनोबायोलोजी [chronobiology] अध्ययन कर “पेटल टाइम क्लॉक” बनाया. उन्होंने निष्कर्षों में पाया कि फूलों की विभिन्न प्रजातियां हर रोज अलग-अलग समय पर खुलती/खिलती हैं.
  • उनके शोध छात्रों में पेहेर कल्म [Pehr Kalm] (फिनलैंड से) और डैनियल सोलेंडर [Daniel Solander] (स्वीडन से) जैसे प्रसिद्ध वनस्पतिविद शामिल थे.
  • रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के संस्थापकों में से एक थे लिनिअस.

निष्कर्ष | Conclusion

लिनियन प्रणाली स्पष्ट रूप से भौतिक लक्षणों में समानता पर आधारित है। इसमें kingdom से लेकर species तक, Texa का एक पदानुक्रम शामिल है. पृथ्वी पर जीवन को समझने के लिए वर्गीकरण एक महत्वपूर्ण कदम है. आज की सभी आधुनिक वर्गीकरण प्रणालियों की जड़ें लिनैनी वर्गीकरण प्रणाली में ही निहित हैं.

प्रत्येक जीवों को दो लैटिन नाम दिए गए हैं जो उनके जीनस और प्रजातियों को इंगित करते हैं. जीवविज्ञानियों ने बाद में समूहों के बीच समानता के अन्य स्तरों के लिए अतिरिक्त रैंकिंग जोड़ी है.

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