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Coffee Processing Methods: Dry, Wet and Pulped natural

Coffee Processing Methods: Dry, Wet and Pulped natural

Coffee [कॉफी], मूलत: अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय सदाबहार क्षेत्र में मौजूद कॉफी पौधे से प्राप्त बीजों को भुन कर और पिसे कर बनाया जाता है. कॉफी दुनिया में सबसे लोकप्रिय तीन पेय पदार्थों में से एक है.

कॉफी विश्वभर की सबसे अधिक लाभदायक अंतरराष्ट्रीय वस्तुओं में से एक है. इसकी लोकप्रियता मुख्यत: इसके स्फूर्तिदायक प्रभाव को मानी जाती है. यह प्रभाव कॉफी में मौजूद कैफीन नामक एक अल्कलॉइड द्वारा निर्मित होता है.

दुनिया की लगभग सभी खपत की आपूर्ति   कॉफ़ी की दो प्रजातियाँ, Coffea arabica  और Coffea canephora, करती हैं.

लैटिन अमेरिका, पूर्वी अफ्रीका, एशिया और अरब Coffea arabica  के प्रमुख उत्पादक हैं. वहीँ पश्चिमी और मध्य अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और ब्राजील Coffea canephora के प्रमुख उत्पादक हैं.

कॉफ़ी का इतिहास | History of Coffee

विश्वभर में Coffee की खोज के बारे में कई किंवदंतियां है जिनमें से एक यह है कि सन् 850 ईसा पूर्व अरब में एक बकरी चरवाहा ने देखा कि एक बकरी अपने झुण्ड से इतर अजीब हरकतें कर रही थी.

चरवाहा बकरी के हरकतों से हैरान था. उसने उन फलों का नमूना लिया जिसे बकरियां खा रही थी. फलों के सेवन से चरवाहे ने खुद ताजगी और उर्जा का अनुभव किया और अपनी इस खोज के बारे में अन्य लोगों को बताया.

एक अन्य मान्यता के अनुसार सन् 15 वीं शताब्दी में Wild Coffee को Kefa (Kaffa) इथियोपिया से, दक्षिणी अरब ले जाया गया जहाँ इसकी खेती की गई.

कॉफी प्रसंस्करण | Processing of coffee

हरी कॉफी का प्रसंस्करण | Processing of green coffee

ग्रीन कॉफ़ी के प्रसंस्करण के लिए तीन विधियां होती है:

1. हलिंग | Hulling

कॉफी पौधे की संरचना के एक झाड़ीनुमा होता है और इसके पके फलों को कॉफी चेरी [coffee cherries] कहा जाता है. प्रत्येक चेरी में आम तौर पर दो कॉफी बीज होते है जिसे Coffee beans (कॉफ़ी बीन्स) कहा जाता है.

मात्र 5 प्रतिशत कॉफ़ी चेरी में केवल एक बीज होता है; पीबेरी [Peaberries] कहलाते हैं. ऐसे एकल बीज वाले Coffee छोटे होते हैं और माना जाता है की यह एक मीठी, अधिक स्वाद वाली कॉफी का उत्पादन करता हैं.

Coffee
Image by StockSnap from Pixabay

2. शुष्क प्रक्रिया | Dry method of coffee processing

यह कॉफी को संसाधित [processing] करने की सबसे पुरानी और सरल विधि, जिसमें कम मशीनरी की आवश्यकता होती है, ब्राजील और इथियोपिया जैसे शुष्क जलवायु में अधिक प्रचलित है.

फलों को हाथ से छांटने के बाद बहते हुए साफ पानी में धुलाई की जाती है तत्पश्चात धूप में सुखाया जाता है. पूरी तरह से सुखाने के लिए इस प्रक्रिया में कई दिन लग सकते हैं.

सुखाने की प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि आवश्यकता से अधिक सूखी कॉफी टूट जाएगी जो  दोषपूर्ण फलियों का निर्माण करेगी और बहुत अधिक नम Coffee में कवक और बैक्टीरिया द्वारा जल्दी खराब हो सकती है.

फलों में लगभग 12-13 प्रतिशत नमी की मात्रा तक सुखाया जाता है. बीज को उनके आवरण से निकलने के लिए उन्हें मशीनों से गुजरा जाता है.

3. गीली प्रक्रिया | Wet coffee processing

Wet process में सूखी विधि की तुलना में अधिक उपकरण की आवश्यकता होती है, किन्तु इस विधि से बेहतर फलियां उत्पादित होती है जो अधिक सजातीय तथा संरक्षण के दृष्टिकोण से अच्छी होती है. अधिकांशत: Coffea arabica  इसी विधि से उत्पादित की जाती हैं, जो कि आम तौर पर एक उच्च कीमत की coffee प्राप्त होती है.

गीली प्रक्रिया के पहले चरण में, ताजे कॉफ़ी फल की छिलके और पल्प को एक पल्प मशीन द्वारा हटाकर किण्वन के द्वारा पल्प की आखरी परत को भी अलग कर दिया जाता है.

इसे धोने के बाद धूप में या गर्म हवा के ड्रायर की सहायता से सुखाया जाता हैं. बीज के चारों ओर की सूखी त्वचा, जिसे Parchment कहा जाता है, को यांत्रिक रूप से हटा दिया जाता है.

4. लुगदी प्राकृतिक प्रक्रिया | The pulped natural process

एक तीसरी विधि, जिसे पल्प्ड नेचुरल कहा जाता है, सूखे और गीले प्रसंस्करण का एक संकर विधि है. पल्प को मशीनों के सहायता से हटा दिया जाता है, लेकिन फलियों को बिना किसी किण्वन के सुखाया जाता है.

सूखने के बाद तक श्लेष्मा को नहीं हटाया जाता है. इस प्रकार से उपचारित बीन्स का आकार उचित तथा मीठे और अम्लीय स्वाद का अच्छा संतुलन होता है.

बीन प्रसंस्करण | Processing the bean

1. डिकैफिनेशन | Decaffeination

डिकैफ़िनेटेड कॉफ़ी शब्द कुछ लोगों को ऑक्सीमोरोन के रूप में प्रभावित कर सकता है, लेकिन कई कॉफ़ी पीने वाले कॉफ़ी के स्वाद को पसंद करते हैं, लेकिन कैफीन से प्रभाव को बर्दाश्त नहीं कर सकते.

डिकैफ़िनेशन की मुख्य विधियाँ रासायनिक सॉल्वैंट्स, कार्बन फ़िल्टरिंग, कार्बन डाइऑक्साइड निष्कर्षण [extraction] या ट्राइग्लिसराइड्स पर आधारित हैं. इन सभी विधियों में, “डिकैफ़” बनाने के लिए, कॉफी को भूनने से पहले ही हरी बीन अवस्था में कैफीन को हटा दिया जाता है.

डिकैफ़िनेशन की प्रक्रिया शुरू में विलायक-आधारित [Solvent based] थी जिसमें 20 वीं शताब्दी की शुरुआत में बेंजीन [benzene] का उपयोग किया जाता था लेकिन बाद में मेथिलीन क्लोराइड या एथिल एसीटेट [Methylene chloride or Ethyl acetate] का उपयोग किया जाने लगा.

प्रत्यक्ष विधि में, कॉफी बीन्स को उबाला जाता है और फिर रासायनिक एजेंट द्वारा धोया जाता है. वहीँ अप्रत्यक्ष विधि में, रासायनिक एजेंट Beans के संपर्क में नही आती, लेकिन Water Based coffee solution से उपचारित किया जाता है जिसमें Beans को पहले भीगकर रखा जाता हैं.

2. भूनना | Roasting

कॉफी के सुगंधित और स्वाद गुणवत्ता उच्च तापमान से विकसित होते हैं. यह तापमान कॉफ़ी को भूनने या उबालने के दौरान दिया जाता है. तापमान लगभग 356-482 डिग्री फारेनहाइट (180-250 डिग्री सेल्सियस) से उत्तरोत्तर बढ़ाया जाता है.

7-20 मिनट तक गर्म किया जाता है, समय कॉफ़ी बीन्स के हलके या गहरे रंग चाहने पर निर्भर करता है. इस दौरान बीन्स से भाप, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य वाष्पशील पदार्थ निकलते हैं, परिणामस्वरूप 14-23 प्रतिशत तक वजन कम हो जाता है.

गैस का आंतरिक दबाव कॉफी बीन्स को 30 से 100 प्रतिशत तक फैला देता है. फलियाँ गहरे, गहरे भूरे रंग की हो जाती हैं, और दबाव में उनकी बनावट झरझरा और उखड़ी हुई हो जाती है.

3. पिसाई | Grinding

कई जगहों पर कॉफ़ी को भूनने के बाद साबुत रखा जाता है जिसे उपभोक्ता के द्वारा खरीदने से पहले या घर पर पिसाई की जाती है.

अधिकांश आधुनिक रोस्टिंग प्लांट्स में, कॉफी को दाँतेदार या स्कोर्ड रोलर्स की एक श्रृंखला के माध्यम Grind किया जाता है. यह मशीन पहले बीन्स को तोड़ते हैं और फिर उन्हें वांछित कणाकार में पिसती है.

इन्स्टैंट कॉफ़ी | Instant coffee

Instant coffee जिसे घुलनशील कॉफी भी कहा जाता है के निर्माण में, गर्म पानी के साथ एक तरल सांद्रता के रूप में तैयार किया जाता है. गर्म पानी को डीहाइड्रेट कर किया जा जाता है.

यह स्प्रे ड्राई (गर्म गैस से सुखाकर) या फ्रीज ड्राई (एक निर्जलीकरण प्रक्रिया जिसे लियोफिलाइजेशन [Lyophilization] के रूप में जाना जाता है) के द्वारा किया जा सकता है.

परिणामस्वरूप घुलनशील पाउडर, गर्म पानी के साथ मिश्रित हो कर पुन: कॉफी बनाता है. वजन कम होने के कारण इंस्टेंट कॉफी की शिपिंग लागत कम हो जाती है और कॉफी बीन्स की तुलना में शेल्फ लाइफ भी बढ़ जाती है.

इसकी सबसे बड़ी खामी यह है की यह आसानी से नमी उठाती है और इसे सूखा रखा जाना एक चुनौती पूर्ण कार्य है. इंस्टेंट कॉफी का स्वाद भी व्यापक रूप से पीसा हुआ कॉफी से कम माना जाता है.

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