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Species at Endangered Condition: Causes and Effects

Species at Endangered Condition: Causes and Effects

“Endangered Species” [लुप्तप्राय प्रजाति] एक ऐसी प्रजाति हैं जिसके अंतर्गत वन्य जीव-जंतु या पेड़-पौधों की प्रजाति विलुप्त हो रहे है या विलुप्त होने की सीमा में है. ऐसे प्रजातियों की उचित रक्षा और प्रबंध नही की गई तो भविष्य में इसकी विलुप्ति की संभावना कही अधिक बढ़ जाती है.

हृास [Threatened] और लुप्तप्राय [Endangered] प्रजातियों के बीच अंतर

U.S. Endangered Species Act 1973 के अनुसार:

“Endangered” [लुप्तप्राय] प्रजाति  ऐसे प्रजातियों के समूहों को संदर्भित करता है, जो विलुप्त होने के कगार में है या इन प्रजातियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विलुप्त हो चूका है.

“Threatened” [हृास प्रजाति] ऐसी प्रजातियों को संदर्भित करता है, जो संभवतया निकट भविष्य में पूरी तरह से खतरे में पड़ने की संभावना है या इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा का हृास हो चूका हो.

The International Union for Conservation of Nature [IUCN] के द्वारा जारी रेड लिस्ट में, “Threatened” को मुख्य तीन श्रेणियों में बाँटा गया है-

  1. गंभीर खतरे की श्रेणी [Critically Endangered]
  2. खतरे की श्रेणी [Endangered]
  3. जो प्रजाति खतरे की चपेट में [Vulnerable]

लुप्तप्राय होने के कारण | Main Causes of Species to Become Endangered

यांत्रिक हस्तक्षेप | Mechanical Destruction

विभिन्न मानवीय गतिविधियां जैसे कृषि, शहरी विकास, खनन, वनों की कटाई और प्रदूषण के परिणामस्वरूप निवास स्थान का विनाश, संशोधन, या प्रतिबंध

मानवीय कार्यकलाप | Human activity

आर्थिक, मनोरंजक, वैज्ञानिक, शैक्षिक, या अन्य उद्देश्यों के लिए एक प्रजाति विशेष का मानव अनियमित शोषण भी गंभीर रूप से प्रजातियों जनसंख्या को प्रभावित करता है.

प्रजातियों में स्वप्रतियोगिता | Self Competition or displace by Species

कई प्रजातियों का द्वारा अन्य प्रजातियों से प्रतियोगिता करना और / या दुसरे प्रजातियों का विस्थापन कर दिया जाना भी लुप्तप्राय होने के मुख्य कारण है.

महामारी या प्राकृतिक आपदायें | Disease or Predation

कुछ गंभीर बिमारियों जैसे महामारी या प्राकृतिक आपदाओं से भी जीवों या पौधों के प्रजातियों का जनसँख्या में काफी गिरावट आती है.

लुप्तप्राय होने के प्रभाव | Effect of Endangered Species

जैव विविधता और खाद्य श्रृंखला पर प्रतिकूल प्रभाव | effect upon Biodiversity and food chain reactions

प्रकृति में सभी प्रजातियां एक-दूसरे पर निर्भर रह कर कार्य करती हैं, इसलिए जानवरों या पौधों की एक छोटी संख्या के विलुप्त होने से पूरे पारिस्थितिक तंत्र में प्रतिकूल असर पड़ता है और इस तरह पर्यावरण पर बड़ा प्रभाव पड़ता है.

औषधीय स्त्रोतों की हानि | Loss of medicinal species

इस प्रकृति में प्रत्येक छोटे-बड़े पादपों में कई आवश्यक रासायनिक घटक निहित होते है जिन्हें औषधी के रूप में उपयोग किया जाता है. यदि ये पौधे लुप्तप्राय या विलुप्त हो जाते हैं, तो हम चिकित्सा उद्देश्यों के लिए पौधों के रासायनिक घटक का उपयोग नहीं कर पाएंगे.

रोग कारकों की वृद्धि | Direct Pathogen Attack to Human Being.

कुछ प्रजातियाँ रोगजनकों और मनुष्यों के बीच बफर जोन के रूप में कार्य करते हैं. जिसके कारण पैथोजन से मनुष्य सीधे संक्रमित होने से बच जाता है. इस प्रकार, यदि प्रजातियां विलुप्त हो जाती हैं, तो यह बफर जोन मिट जाता है फलस्वरूप मनुष्य की रोगों के चपेट में आने की सम्भावना कही अधिक बढ़ जाती है.

Endangered species

लुप्तप्राय प्रजाति का निर्धारण | International Authority for Declaration

वैश्विक स्तर पर International Union for Conservation of Nature [IUCN] विभिन्न संरक्षण संगठनों के साथ मिलकर एक नेटवर्क की तरह काम करता है. इसका मुख्य उद्देश्य यह जानकारी संकलित करना है कि कौन सी प्रजातियां सबसे अधिक खतरे में हैं या ख़त्म हो गयी है.

यह दुनिया भर के 100 से भी अधिक देशों में प्रजातियों के विलुप्त होने के जोखिम और वर्तमान स्थिति का आकलन करती हैं और प्राप्त जानकारी को रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटड स्पीशीज़ में समय-समय पर प्रकाशित भी करती है.

संयुक्त राज्य अमेरिका में, यूएस फिश एंड वाइल्डलाइफ सर्विस और नेशनल मरीन फिशरीज सर्विस उन प्रजातियों की पहचान करने के लिए मिलकर काम करती हैं जो लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम के तहत सुरक्षा व संवर्धन के लिए सुझाए गए हैं.

लुप्तप्राय प्रजाति सूचीबद्ध करना | Enlisting of Endangered Species

अलग-अलग मापदंडों जैसे प्रजातियों की गिरावट की दर, जनसंख्या आकार, भौगोलिक वितरण का क्षेत्र, और जनसंख्या की डिग्री और वितरण विखंडन आदि के आधार पर विलुप्त होने के खतरे व स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है और इसी के आधार पर IUCN रेड लिस्ट तैयार करती है.

उपरोक्त मुल्यांकन के आधार पर प्रजातियों को निम्न प्रकार वर्गीकृत और सूचीबद्ध किया जाता है:

  1. विलुप्त Extinct (EX) – जब  प्रजाति पूरी तरह ख़त्म हो चुकी और कोई शेष नहीं होता है
  2. जंगली में विलुप्त Extinct in the Wild (EW) – केवल विशेष संरक्षित क्षेत्रों में जीवित
  3. गंभीर रूप से लुप्तप्राय Critically Endangered (CR) – जंगली प्रजातियों का विलुप्त होने का अति उच्च जोखिम.
  4. लुप्तप्राय Endangered (EN)  – जंगली प्रजातियों का विलुप्त होने का उच्च जोखिम।
  5. कमजोर Vulnerable (VU) – जंगली प्रजातियों में लुप्तप्राय के खतरे का उच्च जोखिम।
  6. निकटवर्ती खतरा Near Threatened (NT)  – निकट भविष्य में लुप्तप्राय हो जाने की संभावना है।
  7. कम चिंताजनक  Least Concern (LC) – सबसे कम जोखिम इसमें शामिल हैं।
  8. आकड़ों की कमी Data Deficient (DD)  – विलुप्त या लुप्तप्राय होने के जोखिम का आकलन करने के लिए पर्याप्त डेटा प्राप्त नहीं होना.
  9. मूल्यांकन नहीं Not Evaluated (NE) – अब तक मानदंडों के खिलाफ मूल्यांकन नहीं किया गया है।

संघीय सूची प्रक्रिया | Process of Federal Listing

संयुक्त राज्य अमेरिका में जानवरों या पौधों की प्रजातियों को लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम के अंतर्गत संरक्षण देने के पहले लुप्तप्राय और खतरे वाले वन्यजीवों की सूची या लुप्तप्राय और हृास वाले पौधों की सूची में जोड़ा जाता है.

इसके लिए एक याचिका प्रक्रिया या उम्मीदवार मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से उपरोक्त उल्लेखित सूचियों में से किसी एक वर्ग में प्रजाति जोड़ी जाती है। कानून के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक प्रजाति जोड़ने या लुप्तप्राय और खतरे वाली प्रजातियों की सूची से हटाने की याचिका Secretary of the Interior को दे सकता है।

उम्मीदवार मूल्यांकन प्रक्रिया यूएस फिश एंड वाइल्डलाइफ सर्विस बायोलॉजिस्ट द्वारा आयोजित की जाती है.

क़ानूनी प्रावधान | Law for protection

The Endangered Species Act of 1973 [For USA]

जानवरों और पौधों की रक्षा के लिए सन् 1973 में लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम [The Endangered Species Act of 1973] बनाया गया था. 28 दिसंबर 1973 को इस अधिनियम पर हस्ताक्षर करते हुए राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने कहा था, “Nothing is more priceless and more worthy of preservation than the rich array of animal life with which our country has been blessed,”

लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम, सरकारी एजेंसियों, भूस्वामियों और संबंधित नागरिकों को लुप्तप्राय वन्यजीवों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए सामान्य ज्ञान, उचित समाधान प्रदान करता है। अधिनियम में तीन प्रमुख तत्व को शामिल किया गया हैं:

  • सूचीबद्ध प्रजातियों को मारने या नुकसान पहुंचाने से रोकना
  • इन प्रजातियों के अस्तित्व के लिए आवश्यक निवास स्थान की रक्षा करना
  • वन्य जीव व पौधों के स्वस्थ आबादी को बहाल करने की योजना बनाना

Wildlife Protection Act, 1972 [For India]

यह अधिनियम पर्यावरण और पारिस्थितिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश के जंगली जानवरों, पक्षियों और पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रदान करता है. अन्य बातों के अलावा, अधिनियम कई पशु प्रजातियों के शिकार पर प्रतिबंध लगाता है. अधिनियम को अंतिम बार वर्ष 2006 में संशोधित किया गया था.

वन्यजीव अधिनियम के लिए संवैधानिक प्रावधान

  • भारत के संविधान का अनुच्छेद 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार और वन्यजीवों और वनों की रक्षा करने का निर्देश देता है. इस लेख को 1976 में 42 वें संशोधन द्वारा संविधान में जोड़ा गया था.
  • अनुच्छेद 51 A भारत के लोगों के लिए कुछ मूलभूत कर्तव्यों को लागू करता है. उनमें से एक जंगलों, झीलों, नदियों और वन्य जीवन सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना है और जीवित प्राणियों के लिए दया करना है.

निष्कर्ष | Conclusion

हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है कि इस प्रकृति की सुरक्षा और संवर्धन करे. हर समस्या का हल यहाँ मौजूद है, जरुरत है तो बस उसे पहचानने की. यह लेख एक छोटा सा प्रयास है प्रकृति में घटित होने वाले घटना प्रजातियों के लुप्तिकरण और उनके कारणों के बारे में जानकारी प्रदान करने की ताकि सभी जन जागरूक रहे और प्रकृति को सवांरने में मदद करें.

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