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Gregor Johann Mendel: The Father of  Genetics

Gregor Johann Mendel: The Father of Genetics

अनुवांशिकी के पिता [Father of Genetics] ग्रेगोर मेंडल, मूल नाम Gregor Johann Mendel का जन्म हेनज़ेंड्रॉफ़, सिलेसिया, ऑस्ट्रियाई साम्राज्य [अब हिंकिस, चेक गणराज्य] में 22 जुलाई, 1822 ई. को हुआ था एवं मृत्यु 6 जनवरी, 1884 ई. को ब्रुन, ऑस्ट्रिया-हंगरी [अब ब्रनो, चेक गणराज्य] में हुआ था.

Gregor Mendel एक महान वनस्पति विज्ञानी, शिक्षक, और ऑगस्टिन प्रीलेट [Augustinian prelate], जेनेटिक्स के विज्ञान की गणितीय नींव रखने वाले पहले व्यक्ति थे, जिसे मेंडेलिज्म [Mendelism] कहा जाता है.

The Educational History of Gregor Johann Mendel

यहाँ Gregor Mendel के शैक्षणिक जीवन एवं प्रमुख अकादमिक उपलब्धियों का उल्लेख किया जा रहा है… 

Family Background

सीमित साधनों वाले परिवार में जन्मे मेंडल की परवरिश एक ग्रामीण परिवेश में हुई थी. वे एक जर्मन भाषी थे. सिलेसिया के स्थानीय पादरी ने उनकी शैक्षणिक क्षमताओं को पहचाना और उनके माता-पिता को 11 साल की उम्र में उन्हें स्कूल भेजने के लिए राजी कर लिया था।

Basic Educations

सन् 1840 ई. में उनकी जिमनैजियम (Grammer School) की पढ़ाई पूरी हुईइसके बाद मेंडेल ने दर्शनशास्त्र संस्थान, ओल्मुट्ज़ विश्वविद्यालय (ओलोमोकचेक गणराज्य) में दर्शनशास्त्र में दो साल के कार्यक्रम में प्रवेश लिया. जहां उन्होंने भौतिकी और गणित में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया.

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सन् 1843 ई. में घर से दूर उनके शुरुआती साल कठिन थेक्योंकि उनका परिवार गरीबी के कारण उनका पर्याप्त समर्थन नहीं कर सकता था। इसीलिये उन्होंने अन्य छात्रों को Tution पढ़ाया, इस दौरान दो बार उन्हें गंभीर अवसाद [Serious depression] का सामना करना पड़ा अंततः उन्हें ठीक होने के लिए घर लौटना पड़ा।

After Schooling

अपने परिवार के इकलौते पुत्र होने के नाते और इस गरीबी से उबारने के लिए उनके पिता ने खेती करने का सुझाव दिया, लेकिन उन्होंने अपने भविष्य के लिए एक अलग ही समाधान पर विचार कियाजहाँ उन्होंने खुद को ऑल्टब्रुकन मठ [Altbrünn monastery] में ऑगस्टिनियन ऑर्डर [Augustinian order] के एक नौसिखिए [Novitiate] के रूप में दर्ज करने के विकल्प का चयन कियायहीं उन्हें ग्रेगर [Gregor] नाम दिया गया था।

Turning Point of Mendel's Career

एक पादरी होने के नाते, Mendel निरंतर यात्रा करके बीमार लोगों के पास जाते और उन्हें ठीक करने के लिए प्रार्थना एवं धर्म का उपदेश देते इस कारण वह फिर से बीमार रहने लगे. एबॉट साइरिल नप्प [Abbot Cyril Napp] ने उनकी योग्यता देखते हुए उन्हें Znaim [Znojmo, Czech Republic] में एक स्थानापन्न-शिक्षण [Substitute-teaching] के रूप में रखा गयाजहां वे बहुत सफल साबित हुए।

हालाँकि, सन् 1850 ई. में Gregor Johann Mendel एक परीक्षा में असफल हो गए. इसके बाद शिक्षक प्रमाणन के लिए नए कानून के माध्यम से वैज्ञानिक निर्देश के एक नए कार्यक्रम में शामिल हुए जहाँ इसके लाभ के लिए उन्हें दो साल के लिए वियना विश्वविद्यालय [University of Vienna] में भेजा गया।

ओल्मुट्ज़ [Olmütz] के रूप मेंGregor Johann Mendel ने अपना पूरा समय वियना में भौतिकी और गणित के लिए समर्पित कर दियाजो ऑस्ट्रियाई भौतिक विज्ञानी क्रिश्चियन डॉपलर [Austrian physicist Christian Doppler] और गणितीय भौतिक विज्ञानी एंड्रियास वॉन एटटिंगजोन [Mathematical physicist Andreas von Ettinghausen] के तहत काम कर रहे थे।

Gregor Johann Mendel वनस्पति विज्ञान के अन्तर्गत शरीर रचना विज्ञान [Anatomy] और शरीर विज्ञान [Physiology] तथा वनस्पति विज्ञानी फ्रांज उंगेर [Franz Unger] जो सेल सिद्धांत [Cell Theory] और जीवन के विकास के विकासवादी [Pre-Darvinian] दृष्टिकोण के उत्साही समर्थक थे के निर्देशन में माइक्रोस्कोप के उपयोग का भी गहन अध्ययन किया.

सन् 1853 ई. की गर्मियों मेंGregor Mendel ब्रून में मठ में वापिस लौट आएऔर अगले वर्ष उन्हें फिर से एक शिक्षण पद दिया गयाइस बार ब्रूएन रियलस्कुले [Brünn Realschule; Secondary School] मेंजहां वह लगातार 14 साल तक निर्वाचित होने तक बने रहे।

Struggling Phase

इस मठ की चाल ने उसे मोरवेनिया की राजधानी ब्रून [Brünn, the capital of Moravia] में ले गई, जहां पहली बार उसे पूर्व वर्षों के कठोर संघर्ष से मुक्त किया गया था। उन्हें एक विविध और बौद्धिक समुदाय से भी परिचित कराया गया था।

Gregor Johann Mendel ने सन् 1856 ई. में फिर से शिक्षक परीक्षा का प्रयास किया, हालांकि इस घटना के वजह से उनका नर्वस ब्रेकडाउन [Nervous Breakdown] हुआ और लगातार दूसरी बार असफल हुए. दूसरी तरफ यह साल Teacher और Consummate experimentalist के रूप में उनकी सफलता के मामले में अच्छा साबित हुआ था.

एक बार मठाधीश, अपने प्रशासनिक अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए Gregor Johann Mendel को duty के लिए धमकाया गया था। इसके अलावाGregor Mendel ने मठ को राज्य के नए करों के अनुसार भुगतान करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिससे उनका अधिकारियों के साथ लंबे और कड़वे विवाद होते रहे.

ऐसी मान्यता है कि यह कर असंवैधानिक था, Gregor Johann Mendel ने अपना विरोध जारी रखा. इसके साथ ही राज्य के कुछ मठों के प्रशासन का कार्यभार संभालने के बाद भी उन्होंने इसका अनुपालन करने से साफ़ इनकार कर दिया.

Experimental Achievements of Gregor Johann Mendel

यहाँ Gregor Mendel अनुवांशिकता के सिद्धान्त से जुड़ी कुछ रोचक इतिहासिक तथ्यों  के बारे में उल्लेख किया गया है आखिर उनका प्रयोग एक सिद्धान्त कैसे बना. आईये जानते है…

Experimental Setup

सबसे महत्वपूर्ण सन् 1854 ई. में एबॉट सिरिल नप [Abbot Cyril Napp] ने Gregor Johann Mendel को मठ में संकरण (Hybridization) में एक प्रमुख प्रयोगात्मक कार्यक्रम की योजना बनाने की अनुमति दी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संकर संतानों [Hybrid progeny] की क्रमिक पीढ़ियों [Successive generations] में वंशानुगत पात्रों [Transmission of hereditary characters] के संचरण का पता लगाना था।

पिछले कुछ Experiments में देखा गया था कि उपजाऊ संकर प्रजातियों की संतान [Progeny of fertile hybrids] की उत्पत्ति प्रजातियों में वापस आने की प्रवृत्ति थीऔर इसीलिए उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि संकरण [Hybridization] प्रकृति द्वारा बहुविध प्रजातियों [Multiply species] के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक तंत्र नहीं हो सकता है. हालांकि असाधारण मामलों में कुछ उपजाऊ संकर वापस लौटते दिखाई नहीं देते हैं. [तथाकथित निरंतर संकर; Constant hybrids]

Hybridization

Hybridization

Hybridization

Hybridization

दूसरी तरफपौधे और पशु प्रजनकों के द्वारा लंबे समय से देखा जा रहा था कि क्रॉसब्रीडिंग [Cross Breeding] वास्तव में नए रूपों की नस्ल पैदा कर सकती है.

Gregor Mendel ने खाद्य मटर [Pisum sativum] को अध्ययन के लिए चुना क्योंकि यह कई अलग-अलग किस्मों में आसानी से उपलब्ध थी जिसको कल्चर और परागण पर नियंत्रण रखा जा सकता था साथ ही इसमें सफल बीज अंकुरण का अनुपात भी उच्च था. इस तरह सन् 1854 से 1856 ई. तक उन्होंने इनके गुणों के निरंतरता के लिए कुल 34 किस्मों का परीक्षण किया।

लक्षणों (Characters) के संचरण का पता लगाने के लिएउन्होंने सात लक्षण चुने जो विशिष्ट तरीके से व्यक्त किए गए थेजैसे कि पौधे की ऊंचाई (कम या लंबा) और बीज का रंग (हरा या पीला). Gregor Mendel इन विकल्पों को विपरीत वर्ण (Contrasted characters) या वर्ण-युग्म (Character-pairs) के रूप में संदर्भित किया।

Major Findings

Gregor Mendel ऐसी किस्मों का संकरण किया, जिनके लक्षण भिन्न-भिन्न थे, जैसे, लम्बे पौधे को छोटे ऊंचाई वाले पौधे के साथ संकरण. इस संकरण की पहली पीढ़ी (F1) ने एक किस्म का लक्षण (Character) प्रदर्शित हुआ, लेकिन दूसरे किस्म का नहीं.

Mendel की शर्तों में, एक वर्ण प्रमुख (Dominant) था और दूसरा पुनरावर्ती (Recessive) होता है. हालांकि इन संकरण (दूसरी पीढ़ी, F2) से लिए गए कई Progeny में, पुनरावर्ती लक्षण (Recessive Character) पुनः प्रकट हुआ और संतान (offspring) को प्रभावित करने वाली संतानों का अनुपात (Ratio of offspring), पुनरावर्ती को प्रभावित करने वाला अनुपात (Ratio of recessive offspring)  3:1 के अनुपात के बहुत करीब था।

इसी तरह प्रमुख समूह के वंशजों (F3) के अध्ययन से पता चला कि उनमें से एक तिहाई True-breeding और दो-तिहाई Hybrid constitution के थे। इसलिए 3:1 अनुपात 1:2:1 के रूप में फिर से लिखा गया, जिसका अर्थ है कि F2 पीढ़ी का 50 प्रतिशत True-breeding था और 50 प्रतिशत अभी भी संकर. यह Gregor Mendel की प्रमुख खोज थी.

After The Mendelian Years

Gergor Johann Mendel के प्रमुख खोज के बाद भी कुछ ऐतिहासिक घटनाये हुई जिनमे प्रमुख थे…

Something Missing

कुछ Literature’s से ऐसा प्रतीत होता है कि Gregor Mendel ने अपने काम को प्रचारित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया हैऔर यह भी ज्ञात नहीं है कि उनके द्वारा वितरित किए गए उनके शोध पत्र के कितने पुनर्मुद्रण [Reprints] हुए. उस समय उन्होंने 40 Reprints का आदेश दिया थाजिनमें से केवल आठ का पता चला है.

19 वीं शताब्दी में अपने शोधपत्र को प्रकाशित करने वाले जर्नल के अलावा, 15 अन्य स्रोत की पहचान किया गया जिसमें मेंडल के पौधे के संकरण के संदर्भ में उल्लेख किया गया है। इनमें से कुछ उनकी उपलब्धि की स्पष्ट तस्वीर नज़र आती है और अधिकांश बहुत संक्षिप्त में हैं।

During Last Day's

सन् 1871 ई. तक Mendel के पास पर्याप्त समय था जिसमें वह अपने Meteorological और Apicultural संबंधी कार्यों को जारी रख सके। उन्होंने बहुत कम लंबी यात्रा की और सन् 1862 ई. में औद्योगिक प्रदर्शनी [Industrial Exhibition] देखने के लिए उनकी इंग्लैंड की एकमात्र लंबी यात्रा थी।

Bright disease ने उनके पिछले वर्षों को कष्टदायक बना दिया और उनका 61 वर्ष की आयु में 6 जनवरी 1884 ई. को निधन हो गया। मेंडल के अंतिम संस्कार में कई मठ शामिल हुए. शहर के केंद्रीय कब्रिस्तान [Central cemetery] आज भी उनकी कब्र देखी जा सकती है।

Rediscovery of Mendel's Law

Mendel के मृत्यु पश्चात् विश्व के कई वैज्ञानिको ने उनसे प्रेरित होकर या स्वतंत्र रूप से आनुवांशिकता पर शोध किए जैसे…

Hugo de Vries & Carl Erich Correns

सन् 1900 ई. में डच वनस्पतिशास्त्री और आनुवंशिकीविद् ह्यूगो डे व्रीस [Hugo de Vries]जर्मन वनस्पतिशास्त्री और आनुवंशिकीविद कार्ल एरिच कॉरेन्स [Carl Erich Correns] और ऑस्ट्रियाई वनस्पतिशास्त्री एरिक त्सेर्मक वॉन सीसेनेग [Erich Tschermak von Seysenegg] ने स्वतंत्र रूप से मेंडल के समान hybridization experiments के परिणामों की सूचना दीहालांकि प्रत्येक ने दावा किया कि उन्हें Mendel के Research के बारे में पता नहीं थाजब वे अपना काम कर रहे थे.

हालाँकि, de Vries और Correns दोनों ने मेंडल को पहले पढ़ा था इस विषय पर विस्तृत नोट्स भी बनाए थे लेकिन वो भूल गए थे ऐसा दावा किया गया. सन् 1899 ई. में de Vries के परिणामों की विविधता थीलेकिन सन् 1900 में उन्होंने Mendel reports को फिर से पढ़ने के लिए तब तक नहीं लिया जब तक कि वह अपने Experimental Data को तर्कसंगत प्रणाली में चुनने और व्यवस्थित करने में सक्षम नहीं हो गया.

Erich Tschemak

Tschermak ने अपने परिणाम प्राप्त करने से पहले तक Mendel को नहीं पढ़ा थाऔर उनके Experiments का पहला Data वंशानुगत सामर्थ्य [Hereditary potency] के संदर्भ में एक व्याख्या प्रस्तुत करता है। उन्होंने 3:1 अनुपात को “असमान वैधता” [Unequal ValancyWertigkeit] के रूप में वर्णित किया। बाद के शोधपत्रों में उन्होंने Mendelian theory of segregation और purity of the germ cells को अपने रिपोर्ट में शामिल किया. 

William Bateson

ग्रेट ब्रिटेन में, जीवविज्ञानी William Bateson, Mendel’s Law के प्रमुख प्रस्तावक बने। हालांकिडार्विनियन विकास [Darwinian evolution] को मुख्य रूप से छोटेसम्मिश्रित रूपांतरों [Blending variations] के चयन पर आधारित माना गयाजबकि Mendel ने स्पष्ट रूप से गैर-परिवर्तनशील विविधताओं [Nonblending variations] के साथ काम किया.

बेट्सन ने जल्द ही पता लगा लिया कि Mendel ने डार्विनियों के विरोध का सामना किया। मेंडल और उनके समर्थकों को मेंडेलियन कहा जाता थाऔर उनके काम को विकास के लिए अप्रासंगिक माना जाता था। मेंडेलियन सिद्धांत को विकासवादी सिद्धांत के रूप में पर्याप्त विकसित होने और अपनी सही जगह बनाने के लिए तीन दशक से भी अधिक समय लग गए.

Wilhelm Johannsen

एक Characteristic और उसके निर्धारक जीन के बीच का अंतर को Mendel या उनके उत्तराधिकारियों द्वारा सुलझाया नहीं गया था. सन् 1909 ई. में Danish वनस्पतिशास्त्री और आनुवंशिकीविद् Wilhelm Johannsen ने इस बिंदु को स्पष्ट किया और निर्धारक जीन का नाम दिया.

Thomas Hunt Morgan

इसके चार साल बाद अमेरिकी प्राणीविज्ञानी और आनुवंशिकीविद Thomas Hunt Morgan गुणसूत्रों पर जीन का पता लगते हैं, और String पर मोतियों के रूप में उनकी लोकप्रिय तस्वीर उभरी.

Thomas Hunt Morgan की इस खोज ने मेंडेल के निर्धारित लक्षणों के Independent transmission के दावे की पुष्टि करता है. एक ही Chromosome पर एक साथ close होने वाले जीन को Independently transmit नहीं किया जाता है.

Conclusion

आज Nature of investigation के आधार पर Gene को कई तरीकों से परिभाषित किया जाता है। Genetic material को synthesized, manipulate करके दुसरे species से संकरण किया जा सकता है, लेकिन इस पूरे organism को समझने के लिए [Mendelian inheritance] की गहन जानकारी बहुत आवश्यक है। आनुवंशिक प्रयोगात्मक [Architect of genetic experimental] और सांख्यिकीय विश्लेषण [Statistical analysis] के वास्तुकार के रूप में, Gregor Johann Mendel आनुवंशिकी को पिता कहा जाता हैं।

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