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IUCN Red List: Physical Status of Species

IUCN Red List: Physical Status of Species

IUCN Red List [रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटड स्पीशीज़], इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर [IUCN] के द्वारा सूचीबद्ध किया का विश्व की सबसे व्यापक सूचना स्रोतों में से एक है, जो कि पशुओं, कवकों और पौधों की प्रजातियों के वैश्विक स्तर पर विलुप्त होने की स्थिति की सटीक जानकारी देती है.

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर [International Union for Conservation of Nature (IUCN)] की स्थापना सन् 1964 में की गयी थी. इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड में स्थित है.

क्या है आई यु सी एन लाल सूची? | What is IUCN Red List?

विश्व की जैव विविधता [Biodiversity] की निगरानी के लिए IUCN एक महत्वपूर्ण साधन है.  यह न सिर्फ विभिन्न प्रजातियों की सूची तैयार कर उनकी वास्तविक स्थितियों के बारें में पता लगाती है बल्कि उनके  संरक्षण की नीति बनाने या नीतियों में परिवर्तन करने के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता प्रसारित करती हिल.

यह संस्था प्राकृतिक संसाधनों की सीमा, जनसंख्या, आवास और पारिस्थितिकी, उपयोग और/या व्यापार, विभिन्न खतरों और संरक्षण कार्यों के बारे में जानकारी प्रदान करता है जो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए आवश्यक निर्णय लेने में मदद करता है.

सरकारी एजेंसियों, वन्यजीव विभागों, संरक्षण-संबंधित गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), प्राकृतिक संसाधन योजनाकारों, शैक्षिक संगठनों, छात्रों और व्यवसाय समुदाय द्वारा IUCN रेड लिस्ट का उपयोग किया जाता है.

वर्तमान में रेड लिस्ट बनाने की प्रक्रिया में IUCN स्पीशीज़ सर्वाइवल कमिशन और उनके नेटवर्क पार्टनर जैसे, IUCN ग्लोबल स्पीशीज़ प्रोग्राम स्टाफ, विभिन्न संगठन और विषय विशेषज्ञ आदि शामिल होते है, जो विश्वभर की प्रजातियों की जानकारी संकलित करके IUCN Red List तैयार करता है.

IUCN की आवश्यकता क्यों? | Need for ICUN Red List

एक अनुमान के अनुसार IUCN 2020 के अंत तक कम से कम 160,000 प्रजातियों की आकलन बढ़ाने की आवश्यकता है जिससे खतरे में पड़े प्रजातियों एवं जैव विविधता को प्रभावी ढंग से बचाया जा सके. इसके दूरगामी परिणाम होंगे जैसे, वैश्विक कर-संबंधी कवरेज में सुधार होगा और बेहतर संरक्षण के साथ-साथ  नीतिगत निर्णय लेने की दिशा में सक्षम आधार भी मिलेगा.

आईयूसीएन रेड लिस्ट से न केवल लक्षित प्रजातियों की पहचान व पुनः सृजन में मदद मिलेगी बल्कि उन प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्थलों और आवासों की पहचान करके संरक्षण एजेंडे से जोड़ने में मदद मिलेगी, जिन्हें असल में संरक्षित करने की आवश्यकता है.

प्रमुख लक्ष्य | Aim of The IUCN

निम्नलिखित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए यह कार्य करता है…

  • वैश्विक स्तर पर प्रजातियों और उप-प्रजातियों की स्थिति पर वैज्ञानिक डेटा प्रदान करना.
  • प्रजातियों और जैव विविधता के विलुप्तता के कारकों का पता लगाना तथा इस सम्बन्ध में जागरूकता फैलाना.
  • जैव विविधता के संरक्षण के लिए एक प्रभावी योजना बनाना.

रेड लिस्ट के प्रमुख उद्देश्य | Objectives of IUCN Red List

IUCN रेड लिस्ट में उल्लिखित जानकारी का उपयोग विभिन्न संगठनों द्वारा निम्नलिखित तरीकों से किया जाता है:

  1. अंतर्राष्ट्रीय समझौते जैसे, CITES, रामसर कन्वेंशन आदि रेड लिस्ट डेटा का ही उपयोग करके ही प्रकृति की स्थिति के अनुरूप महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं.
  2. बड़े पैमाने पर अधोसंरचना निर्माण और वैश्विक परियोजनाओं के कारण जैव विविधता को होने वाले नुकसान व जोखिम का मूल्यांकन करने के लिए विश्व बैंक समूहो के द्वारा IUCN रेड लिस्ट डेटा का उपयोग किया जाता है.
  3. चिड़ियाघरों और राष्ट्रीय उद्यानों के द्वारा  IUCN रेड लिस्ट डेटा का ही उपयोग समय-समय पर पार्क नियमों जैसी महत्वपूर्ण नीतियों के उन्नयन के किया जाता हैं.

IUCN की रणनीति | Plan of Action

आकलन [Assessment] – दुनिया को विभिन्न प्रजातियों की निगरानी और जैव विविधता की वास्तविक स्थिति के बारे में सूचित करना, जिससे  हमारे जीवमंडल के संरक्षण के लिए उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके.

योजना [Plan] – प्रजातियों के संरक्षण कार्यों को सुनिश्चित करने के लिए विज्ञान-आधारित रणनीतियों को सबसे प्रभावी दंग से लागू करना.

अधिनियम [Act] – सरकारों, शैक्षिक संस्थानों, समाज और निजी क्षेत्र से जुड़े कार्यों को आपसी सामंजस्य से जैव विविधता की स्थिति में सुधार करना.

संवाद [Conversation] – IUCN की प्रजाति संरक्षण कार्यों की प्रभावशीलता को रणनीतिक और प्रभावी संचार के माध्यम से बढ़ाया जाता है.

वर्तमान स्थिति | Species at present

IUCN की आधिकारिक वेबसाइट में दी गई जानकारी के अनुसार. लगभग 32,000 से अधिक प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है जो कि कुल आकलन का मात्र 27 प्रतिशत है. जिसमें सभी प्रकार की जीव-जंतु व पेड़-पौधे शामिल है. अब तक लगभग 120,000 प्रजातियों का आकलन Red List के लिए किया जा चूका है.

प्रजातियों का अब तक किये गए कुल मूल्यांकन और उनका प्रतिशत निम्न है:

Amphibians- 41% 

Mammals- 26% 

Conifers- 34% 

Birds- 14% 

Sharks and rays- 30% 

Reef corals- 33% 

Selected crustaceans- 28 % 

2020 के लिए IUCN संरक्षण लक्ष्य | Goal for 2020

जैसा कि उपरोक्त उल्लेखित किया गया है IUCN रेड लिस्ट के लिए 120,000 से अधिक प्रजातियों का आकलन किया जा चूका है. निश्चित ही यह एक अविश्वसनीय उपलब्धि है. तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण प्रजातियाँ तेजी से नष्ट हो रही है इसलिए, जंगली प्रजातियों (पौधों, जानवरों और कवक) की आकलन दोगुनी तेजी से करने की आवश्यकता है.2020 के अंत तक IUCN ने 160,000 प्रजातियां आकलन का लक्ष्य निर्धारित किया हैं.


Image source: www.iucnredlist.org

IUCN रेड लिस्ट में भारतीय प्रजातियाँ | IUCN Red List for India

IUCN Red List में भारतीय पौधों और जानवरों की संख्या लगातार बढ़ रही है. 2008 में जारी रेड लिस्ट में पौधों की कुछ 246 प्रजातियाँ ही शामिल थीं. सन् 2013 तक यह संख्या बढ़ कर 325 हो गयी. इसी तरह 2014 में जारी रेड लिस्ट के अंतर्गत संकटग्रस्त पौधों की कुछ संख्या 332 तक पहुँच गई.

2012 के IUCN रेड लिस्ट में शामिल कुल पौधों में से ऐसे 62 प्रजातियों की पहचान की गई जो गंभीर रूप से लुप्तप्राय हो रही हैं, अर्थात तत्काल खतरे में विलुप्त [Critically Endangered] हो रही हैं.

हमारे देश में न केवल पौधे संकटग्रस्त [Endangered] और खतरे [Threatened] में हैं बल्कि कई जानवर, कीड़े और सरीसृप भी विलुप्ती [Extinction] के कगार पर हैं. विश्व बैंक की लुप्तप्राय स्तनधारियों की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में खतरे वाली स्तनधारियों [Threatened mammals] की भारत में चौथी सबसे बड़ी संख्या है.

4 मार्च 2013 को भारतीय लोक सभा में तात्कालिक पर्यावरण और वन के लिए राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रही श्रीमति जयन्ती नटराजन के द्वारा एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी थी जिसके अनुसार

संवहनी पौधों (एंजियोस्पर्म, जिम्नोस्पर्म, टेरिडोफाइट) की 19,156 प्रजातियां भारत में अब तक दर्ज की गई, जिसमें से 1,236 प्रजातियां विभिन्न खतरे वाली श्रेणियों जैसे चिंताजनक लुप्तप्राय [Critically Endangered], लुप्तप्राय [Endangered], कमजोर[Vulnerable] आदि हैं.

इन्ही में से 17 ऐसे पौध प्रजातियों की पहचान की गई जो संभवतः विलुप्त हो चुकी है, क्योंकि यह प्रजातियाँ पिछले पचास वर्षों से भी अधिक समय से जंगली या प्राकृतिक आवासों में नहीं देखे गए है.

यह 17 पौध प्रजातियां निम्नलिखित है:

  1. Isoetes dixitii Shende,
  2. Isoetes sampthkumarniiN. Rao, 
  3. Selaginella cataractarum Alston, 
  4. Lastreopsis wattii (Bedd.) C. Chr.
  5. Ophiorrhiza brunonis Wight & Arn.
  6. Ophiorhiza caudata  Fischer, 
  7. Ophiorrhiza radicans ,
  8. Wenlandia angustifoliaWight, 
  9. Sterculia khasiana Deb, 
  10. Carex repanda B. Clarke, 
  11. Eragrostis rottleri Stapf 
  12. Eriochrysis rangachariiB. Clarke, 
  13. Dipcadi concanense (Dalz.) Baker, 
  14. Dipcadi reidii Deb & Dasgupta, 
  15. Urginea polyphylla  f., 
  16. Corypha taliera,
  17. Hedychium marginatum C.B. Clarke

निष्कर्ष | Conclusion

Biodiversity और Ecosystem को ह्रास से बचाने के लिए जीवमंडल में उपस्थित सभी प्रजातियों की रक्षा और संवर्धन नितांत आवश्यक है. IUCN इस तारतम्य में नि:संदेह उत्कृष्ट कार्य कर रहा है. इसकी सफलता और अधिक सुनिश्चित हो जाएगी यदि इससे आम नागरिक, समाज, प्रशासन, सरकारें तथा गैर सरकारी संगठन भी जुड़े और सभी मिल कर एक इकाई की तरह कार्य करें.

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