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Mahua: The Indian Butter Tree

Mahua: The Indian Butter Tree

Mahua [महुआ], वानस्पतिक नाम मधुका लोंगिफ़ोलिया [Madhuca longifolia], परिवार सपोटेसी [Sapotaceae]है इसे आमतौर पर ‘बटर नट का पेड़’ के नाम से भी जाना जाता है. Mahua एक बहुउद्देशीय उष्णकटिबंधीय पेड़ है जो भारत, श्रीलंका, बर्मा और नेपाल में पाया जाता है.

इसे विभिन्न भौगोलिक क्षेत्र में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे: Butter tree, Honey tree, Butter-nut tree, Mabua butter tree, Bassia, Indian butter tree, Moatree, Mowra butter tree, Mahua and Moatree etc.

भौगोलिक उपलब्धता | Geographical Distribution

भारत में पाए जाने वाले उष्णकटिबंधीय मिश्रित पर्णपाती वन के कारण महुआ पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, गुजरात और उड़ीसा राज्य में बहुतायत पायी जाती है.

यह पौधे चट्टानी भूमि के साथ ही साथ अम्लीय एवं क्षारीय मिट्टी पर भी अच्छी तरह से पनपता है. इसकी जड़े गहरीमजबूत के साथ फैली होती है. मुख्य तने का व्यास लगभग 80 सेमी. होती है.

संरचना | Physiology of Mahua tree

साधारणतया देखा गया है कि महुआ एक मध्यम आकार का विशाल पर्णपाती छायादार वृक्ष है जो लगभग 15-20 मीटर लंबा होता है. यह शुष्क उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु क्षेत्र में व्यापक रूप से पाया जाता है.

पत्तियां मोटी लगभग 10-30 सेमी. लंबी, शाखाओं के अंत में चमकदार विशिष्ट रूप से गुच्छेदार होती हैं. जिसे तोड़ने पर दूधिया पदार्थ बाहर निकलता है. युवा पत्ते गुलाबी रंग के और नीचे के ओर ऊनी होते हैं.

महुआ का आर्थिक महत्त्व | Economic Importance

महुआ फुल | Mahua Flowers

फुलों का आकर छोटे और मांसल, पीले रंग के होते है जो कि गुच्छों में शाखाओं के अंत में लगती है. मार्च-अप्रैल से सामान्य रूप से फूल आते हैं जिसकी विशेष सुगंध काफी दूर तक फैलती है. इन्ही फूलों का उपयोग शराब, मिठाई, शरबत, दवाई बनाने में किया जाता है.

फल [टोरा/टोरी] | fruits of Mahua

छत्तीसगढ़ के स्थानीय बोली के अनुसार महुआ को टोरा या टोरी के नाम से जाना जाता है. इसके परिपक्व फल मई-जून के महीने में प्राप्त होते है. आकार में बड़े फल गूदेदार होते है जिन्हें सब्जी की तरह उपयोग भी किया जाता है.

Mahua

बीज | Seeds

बीज को तोड़कर गिरी को सुखाया जाता है जिसे बाजार में बिक्री की जाती है या तेल निकला जाता है. यह तेल औषधि महत्त्व के होते है जिनका उपयोग त्वचा रोगों के इलाज़ में किया जाता है. स्थानीय आदिवासी समुदाय के द्वारा इस तेल का उपयोग ठण्ड में त्वचा के देखभाल के लिए करते है.

पत्तियां | Mahua Leaves

इसकी पत्तियां भी दवाई के रूप में उपयोग की जाती है. चुकीं महुआ की पत्तियां 10-30 सेमी. लंबी 8-10 सेमी. चौड़ी और इसकी मोटाई काफी अच्छी होती है इसलिए इसका उपयोग ज्यादातर दोना-पत्तल [Leaf plate for surving food] के रूप में स्थानीय स्तर पर किया जाता है.

महुआ खली | Mahua oil cake [A by product]

टोरा से तेल निकलने के पश्चात् गहरे भूरे या काले रंग का पदार्थ प्राप्त होता है जिसे खली कहा जाता है. इसका उपयोग पशु चारा या मछलियों के चारे के रूप में करते है. स्थानीय लोगों के द्वारा इसे रात में जला कर मच्छर भागने में भी उपयोग करते है.


Photo Source: Wikipedia Hindi

मधुका लोंगिफोलिया में पाए जाने वाले पोषक तत्व | Phyto Nutrients of Mahua

राष्ट्रीय पोषण संस्थान [हैदराबाद] में हुए शोध के अनुसार प्रति 100 ग्राम महुआ फुल में निम्न पोषक तत्व की मात्रा पाई जाती है…

उर्जा – 111 kcal,

नमी – 73.6 ग्राम

प्रोटीन – 1.4 ग्राम

वसा – 1.6 ग्राम

खनिज – 0.7 ग्राम

कार्बोहाइड्रेट – 22.7 ग्राम

कैल्शियम – 45 मि.ग्रा.

फास्फोरस – 22 मि.ग्रा.

आयरन – 0.23 मि.ग्रा.

कैरोटिन (विटामिन ए) – 307 माइक्रोग्राम

विटामिन सी – 40 मि.ग्रा.

महुआ का पारम्परिक उपयोग | Ethno-pharmacological Uses of Mahua

बीजों से प्राप्त तेल का उपयोग त्वचा रोग, गठिया और सिरदर्द में किया जाता है. यह कब्ज, बवासीर में एक वमनकारी के रूप में भी उपयोगी माना जाता है.

फूलों को पारंपरिक रूप से शीतलन कारक, टॉनिक, कामोद्दीपक, तीव्र और पुरानी टॉन्सिलिटिस [acute and chronic tonsillitis], ग्रसनीशोथ [pharyngitis] के साथ-साथ ब्रोंकाइटिस [bronchitis] के उपचार के लिए उपयोग किया जाता है.

पत्तियां कफ़नाशक होती है और पुरानी ब्रोंकाइटिस और कुशिंग रोग [Cushing’s disease] के लिए भी उपयोग की जाती हैं.

एक्जिमा को राहत देने के लिए पत्तियां को लेप के रूप में लगाया जाता है. इसकी नयी ऊपरी पत्तियों का उपयोग सूजन के उपचार के लिए किया जाता है.

छाल का उपयोग जोड़ों के दर्द, रक्तस्राव और मसूड़ों के सूजन के लिए काढ़े के रूप में किया जाता है. इसके अलावा छाल के चूर्ण का उपयोग खुजली के उपचार के लिए किया जाता है.

पुरानी अल्सर में लोशन के रूप में तेल का उपयोग किया जाता हैं.

सामान्य दुर्बलता के कारण होने वाले नपुंसकता में महुआ का सेवन दूध के साथ फायदेमंद होता है.

प्रमाणिक औषधीय उपयोग | Pharmacological Uses

प्रमुख उपयोग | Main Uses

सूखे फूलों को दूध में उबाला जाता है और नसों की कमजोरी और न्यूरो मस्कुलर सिस्टम [Neuro muscular system] की बीमारियों के इलाज के लिए 40-50 मि.ली. की खुराक में दी जाती है.

कई बार महुआ के फूलों को दूध में उबालकर मिश्री के साथ मिलाया जाता है और शुक्राणुओं की संख्याशीघ्रपतन और प्रसवोत्तर अवधि में कम दूध का बनना आदि समस्याओं के लिए 40-50 मि. ली. की खुराक दी जाती है.

स्पंजी और रक्तस्राव वाले मसूड़ों के लिए, छाल के अर्क के मि.ली. मात्रा को 300 मिलीलीटर पानी के साथ मिलाया जाता है। छाल के अर्क के साथ गरारे करना भी तीव्र टॉन्सिलिटिस [Acute tonsillitis] और ग्रसनीशोथ [Pharyngitis] में उपयोगी है।

सांस सम्बन्धी बीमारियों के लिए Mahua छाल पाउडर और गूलर लेटेक्स को साथ मिलाकर दिन में दो बार 5 ग्राम की खुराक में दी जाती है.

चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम [Irritable bowel syndrome] और दस्त के इलाज के लिए पेड़ की छाल से तैयार काढ़ा 30-40 मि. ली. की खुराक में दिया जाता है.

स्थानीय समुदायों के द्वारा महुआ फूल या छाल से तैयार ठंडा अर्क [Cold infusion30-40 मि. ली. की खुराक में दिया जाता है ताकि शरीर में जलनबुखार कम किया जा सके.

अन्य उपयोग | Other Uses

बीजों से निकाला गया तेल त्वचा रोगों और शरीर के दर्द से प्रभावित क्षेत्र पर लगाया जाता है. गठिया के लिएछाल को पानी में उबालकर तैयार छाल का काढ़ा आंतरिक रूप से लिया जाता है और बीज का तेल बाहरी रूप से प्रभावित क्षेत्रों पर लगाया जाता है.

उच्च रक्तचापहिचकी और सूखी खांसी के इलाज के लिए फूलों का ताजा रस 20-25 मि. ली. की खुराक में दिया जाता है.

सामान्य दुर्बलता से पीड़ित रोगियों के लिए महुआ फूलों से बना ठंडा अर्क [Cold infusion] फायदेमंद है.

मधुमेह [diabetes] के प्रबंधन और डायरिया के इलाज़ के लिए एक कप महुआ छाल काढ़ा दिन में दो बार लिया जाता है.

इसके फूल बहुत पौष्टिक होते हैं और सामान्य टॉनिक के रूप में उपयोग किये जाते हैं. साथ ही सूखे फूल के पाउडर को घी और शहद के साथ खाया जाता है.

निष्कर्ष | Conclusion

समाज में महुआ को मात्र शराब बनाने के लिए जाना जाता है इसका मुख्य कारण इस विषय में ज्ञान और शिक्षा की कमी है. यह लेख इसी तारतम्य में है जिससे लोगों को महुआ के औषधीय गुणों के बारे में एक सार्थक जानकारी दी जा सके. 

चेतावनी: उपरोक्त सुझाये गए औषधी मात्राओ का सेवन योग्य चिकित्सक के निर्देशानुसार ही करें.

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