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Nanoparticles: The science of the next level

Nanoparticles: The science of the next level

Nanoparticles, एक अतिसूक्ष्म इकाई होती है जिसे नैनोमीटर (Nanometer; nm) में मापा जाता है (1 nm = 10−9 Meter). यह प्राकृतिक रूप से मौजूद होते है इसके अलावा मानवीय गतिविधियों के परिणामस्वरूप Artificially भी बनाए जाते हैं। उनके Sub-Microscopic size के कारण, उनके पास Unique Material विशेषताएं होती हैं. Modern Science में Nanoparticle का उपयोग में Medical, Engineering, Catalysis और पर्यावरणीय उपचार (Remediation) के साथ साथ विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक रूप से अनुप्रयोग किये जा रहे हैं.

Properties of Nanoparticles

अंतर्राष्ट्रीय संगठन मानकीकरण 2008 (International Organization for Standardization; ISO 2008) ने इसे परिभाषित किया जिसके अनुसार 1 Nanoparticle एक Discrete Nano-object के रूप में बताया गया, जहां सभी तीन Cartesian Dimension 100 nm से कम हैं। इसी तरह ISO ने Two dimensional Nano object (Nanodiscs & Nanoplates) और One dimensional Nano object (Nanofibres & Nanotubes) को भी परिभाषित किया है।

The Physical Property of Nanoparticles

Nanotechnology Research में Nanoparticle के तीन प्रमुख भौतिक गुण (Physical Property) पाए गए हैं, और सभी आपस में परस्पर जुड़े हुए हैं:

  1. Nanoparticle मुक्त अवस्था में अत्यधिक गतिशील होते हैं. उदाहरण के लिए, किसी अन्य अतिरिक्त प्रभाव के अभाव में, पानी के अन्दर 10 nm व्यास वाले सिलिका Nanosphere का गुरुत्वाकर्षण के कारण अवसादन दर (Sedimentation rate) 0.01 mm/day होता है. यह सामान्य दर से काफी अधिक है.
  2. इसके पास विशाल विशिष्ट सतही क्षेत्र होता हैं. जैसे, एक मानक चम्मच या लगभग 6 मिलीलीटर, 10 mm व्यास के सिलिका Nanospheres में, एक दर्जन से अधिक Double sized tennis courts की तुलना में अधिक सतही क्षेत्र (surface area) होगा.
  3. Nanoparticle quantum effects को प्रदर्शित करने में सक्षम होते है इसलिए इसके उपयोग या उत्पाद के आधार पर रचनाओं की एक विशाल श्रृंखला बनाई जाती है।


Nanoparticles
Image Credit: pixabay.com

Formation of Nanoparticles

Nanoparticles को महत्वपूर्ण तीन विधियों में से किसी एक के द्वारा बनाया जाता है: Comminution (material के स्पंदन द्वारा), जैसे, औद्योगिक मिलिंग (Industrial milling) या प्राकृतिक अपक्षय (Natural Weathering) के माध्यम से; Pyrolysis (भस्म) द्वारा या sol-gel synthesis (कोलाइडल निलंबन से inorganic materials की पीढ़ी) द्वारा।

Detection Methods of Nanoparticles

प्रकाशिय तरंग दैर्ध्य की तुलना में Nanoparticles 4 से 7 गुणा छोटे आकर के होते है इसलिए इनका पता लगाना एक बड़ी चुनौती होती थी. केवल कुछ परिस्थितियों में तरल नमूनों का Optical Microscope के तहत इसका का अवलोकन किया जा सकता हैं।

मुख्य रूप से Transmission Electron Microscopy (TEM), Scanning Electron Microscopy (SEM) और Atomic Force Microscopy (AFM) तकनीकों के मदद से इसका पता लगाया जाता है. इनके द्वारा Nanoparticle बारे में सारी बुनियादी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। 


Nanoparticles
Image Credit: pixabay.com

Application On Medical Sciences

  • Medical Science अब तेजी से Nanoparticles का उपयोग दवा बनाने में हो रहा है क्योंकि यह न केवल पूरे शरीर में व्यापक रूप से प्रसारित हो सकते हैं, बल्कि कोशिकाओं में भी प्रवेश आसानी से कर सकने में सक्षम होते हैं. 
  • इसके अलावा इनका use विशिष्ट कोशिकाओं से बंधने के लिए भी डिज़ाइन किए जा रहे हैं जो ट्यूमर और अन्य रोगग्रस्त ऊतकों के उपचार में सहायक होते है.
  •  सबसे महत्वपूर्ण इससे चिकित्सा को नए आयाम मिला है, जैसे कि Nanoparticles Drugs के Payloads द्वारा रोगग्रस्त ऊतकों और ट्यूमर (Tumours) के Vasculature को block करके Local Heating (Hyperthermia) प्रदान किया जाता है जिससे targeted treatment दिया जा सके.
  • Nanofiber ऊतक और हड्डी की मरम्मत के लिए नई संरचनाओं के डिजाइन और निर्माण में एक महत्वपूर्ण कड़ी कि भूमिका निभाते जैसे कि, कैल्शियम हाइड्रॉक्सापेटाइट के Nanoparticle, हड्डी में पाये जाने वाला एक प्राकृतिक घटक, जो Collagen या Collagen substitutes के साथ संयोजन में उपयोग किया जाता है. भविष्य में Tissue repair therapies में उपयोग किया जा सकता है।
  • Nanotechnological Research में ऐसे Nanoparticles का विकास किया गया है जिसमें साँस (inhalation) के माध्यम से Brain को सीधे दवा पहुचाई जा सकती है, यह तकनीक Parkinson disease, Alzheimer disease, and Multiple sclerosis जैसे रोगों के उपचार में कारगर साबित हो रहा है.
  • कुछ दशकों से Nanoparticle का उपयोग Health related product के निर्माण में बड़ी तेजी से किया जा रहा है. इसी क्रम में 1990 के दशक में University of Oxford में Nanoparticle का use करके Optisol नामक एक Sunscreen का आविष्कार किया गया. इस आविष्कार का मुख्य उद्देश्य  एक सुरक्षित Sunscreen विकसित करना था जो visible light में पारदर्शी हो, किन्तु त्वचा पर ultraviolet विकिरण को अवरुद्ध करने में सक्षम हो.

Nanoparticles and Environment

  • Nanoparticles पर्यावरण में बड़ी मात्रा में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। जैसे, समुद्री नमक कुछ Nanometre आकार के एक Aerosol उत्सर्जित करता है, जो ऊपर उड़ता हुआ वायुमंडल में विलीन हो जाता है.
  • इसी तरह ज्वालामुखियों और आग के धुएं से निकलने वाले Nanoparticles में विशाल विविधता होती है, जिनमें से कई को वैज्ञानिकों द्वारा वर्गीकृत किया जा सका है जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होते है.
  • रेगिस्तान और खेतों से उड़ने वाले धुल के कणों में भी Nanoparticle के विभिन्न आकार और प्रकारों की विशाल श्रृंखला पाई गई है. यहां तक कि पेड़ों से भी Nanoparticles का उत्सर्जन होता पाया गया है. यह हाइड्रोकार्बन यौगिकों जैसे Terpenes (जो जंगलों में दिखाई देने वाले नीले धुंध का उत्पादन करते हैं) से निकलते हैं.

Harmful Effects Of Nanoparticles

  • तंबाकू धूम्रपान और आग के धुएं में उपस्थित Nanoparticles मनुष्य के फेफड़ों के लिए घातक पाए गए है. सबसे महतवपूर्ण हानिकारक प्रभाव उन महिलाओं में देखा गया जो गाँवों में खाना बनाने के लिए पारंपरिक चूल्हे या केरोसीन आधारित स्टोव से उत्सर्जित धुएं के नियमित संपर्क में थे.
  • चूहों में किये गए अधिकांश अध्ययनों में Nanoparticle का हानिकारक प्रभाव श्वास के द्वारा फेफड़ों पर पाया गया. इस स्थिति में फेफड़े की कोशिकाएं इसे अवशोषित कर लेती है फलस्वरूप Cell Damage हो जाती है या आनुवांशिक उत्परिवर्तन (Genetic Mutation) होने की सम्भावना होती हैं.
  • इसके अलावा ना सिर्फ धुआं बल्कि भोजन और पानी में उपस्थित Nanoparticle भी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं. 
  • एक अन्य अध्ययन से पता चला है कि, food additive में पाए जाने वाला E171 तत्व, जिसमें टाइटेनियम डाइऑक्साइड (Titanium dioxide) के Nanoparticle होते हैं, को खाने से Gut Microbiota (आंत में पाए जाने वाला एक बैक्टीरिया) आँतों में सूजन जैसी गंभीर बीमारी उत्पन्न करने में योगदान देता है.

Conclusion

उपरोक्त तथ्यों के आधार पर हम मान सकते है कि Nanoparticles एक बहुआयामी वैज्ञानिक तकनीक है जिससे पर्यावरण और समाज को एक बेहतर स्तर पर पहुंचा सकता है. इस ओर प्रयास जारी है. Nanoparticles के स्वास्थ्यगत लाभ को देखते हुए इसे उपचार के नए और बेहतर क्षमता के रूप में देखा जा रहा हैं इसलिए इसे हम  नैनोमेडिसिन (Nanomedicine) का उदय कह सकते है

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