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P Maheshwari: The Father of Indian Embryology

P Maheshwari: The Father of Indian Embryology

Dr. Panchanan Maheshwari  [डॉ. पंचानन माहेश्वरी] पादप भ्रूणविज्ञान [Plant embryology], आकृति विज्ञान [Morphology] और शरीर रचना विज्ञान [Anatomy], पादप शरीर क्रिया विज्ञान [Plant physiology] और जैव रसायन [Biochemistry] में विशेषज्ञता वाले एक प्रख्यात वनस्पतिशास्त्री थे.

डॉ. माहेश्वरी पहले पादप जीवविज्ञानी थे जिन्होंने एंजियोस्पर्म के टेस्ट-ट्यूब फर्टिलाइजेशन की तकनीक की स्थापना की थी. डॉ. पंचानन माहेश्वरी को Father of Indian Embryology भी कहा जाता है.

इसके अलावा Dr. Panchanan Maheshwari  द्वारा एक और मील का पत्थर साबित होने वाला आविष्कार किया गया था जिसमें पुष्पों के पराग [Anther culture] का उपयोग करके अगुणित [Haploids] का उत्पादन किया गया था.

इस खोज ने पादप जीव विज्ञान में एक नए युग की शुरुआत की और कई उन्नत फसल प्रजातियों के विकास का मार्ग प्रशस्त किया.

डॉ. पंचानन माहेश्वरी का जीवन और शिक्षा | Life and Education of P. Maheshwari

वनस्पतिविद डॉ. पंचानन माहेश्वरी का जन्म 9 नवंबर 1904 को राजस्थान के जयपुर शहर में हुआ था. उन्होंने इलाहाबाद के इविंग क्रिश्चियन कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की, जिनका उद्देश्य चिकित्सा के क्षेत्र में अपना करियर बनाना था.

Ewing Christian College में माहेश्वरी विनफील्ड डडगॉन [Winfield Dudgeon] के मार्गदर्शन में आए और अपनी अध्ययन रूचि को चिकित्सा से विज्ञान के क्षेत्र में बदल दिया.

उन्होंने अपनी बैचलर ऑफ साइंस (1925), मास्टर ऑफ साइंस (1931), और डॉक्टर ऑफ साइंस (1931) की डिग्री विनफील्ड डडगॉन के प्रभाव में अर्जित की. डॉ. माहेश्वरी एक नास्तिक थे.

सन् 1930 में पढ़ाई के बाद उन्हें आगरा कॉलेज में नियुक्ती हुई. उन्होंने क्रमशः इलाहाबाद, लखनऊ और ढाका विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया. वह सन् 1948 में दिल्ली विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान के अध्यक्ष के रूप में आए और हमेशा के लिए यही बस गए.

मस्तिष्क की सूजन से पीड़ित होने के कारण उनका 18 मई 1966 को दिल्ली में निधन हो गया.

विज्ञान में उनका योगदान | Contributions on Science of P. Maheshwari

‘एन इंट्रोडक्शन टू द एम्ब्रियोलॉजी ऑफ एंजियोस्पर्म’, डॉ. माहेश्वरी के द्वारा लिखित एक मशहूर पुस्तक है,  जो 1950 में प्रकाशित हुई थी.

इसे एक क्लासिक माना जाता है क्योंकि यह पुस्तक सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला [Cited] जीव विज्ञान ग्रंथों में से एक है.

उन्होंने 1951 में इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ प्लांट मॉर्फोलॉजिस्ट की स्थापना की और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल फाइटोमॉर्फोलॉजी की भी शुरुआत की.

उनके शोध समूह ने भारत में एंजियोस्पर्म और कुछ जिम्नोस्पर्म के 100 से अधिक कुल की जांच की. वह ‘An illustrated Flora of Delhi’ पुस्तक के लेखक भी हैं – जिसे सभी के लिए एक उत्कृष्ट फील्ड गाइड माना जाता है.

  1. Maheshwari मंत्रिमंडल की विज्ञान सलाहकार समिति के सदस्य थे और देश के प्रमुख वैज्ञानिक संगठनों में उनका प्रमुख योगदान था. उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी पहचान मिली है।

Maheshwari
Image by magdakamyszek from Pixabay

पुरस्कार और सम्मान | Awards and honors of Dr. Maheshwari

पंचानन माहेश्वरी दुनिया के वैज्ञानिक थे और कई अकादमियों ने उन्हें फाउंडेशन फेलो बनाकर सम्मानित किया गया.

1934 में वे इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज, बैंगलोर के फेलो बन गए. इसीतरह 1958 में इंडियन बॉटनिकल सोसाइटी ने उन्हें बीरबल साहनी मेडल से सम्मानित किया गया था.

वह 1968 के लिए भारतीय विज्ञान कांग्रेस एसोसिएशन के जनरल अध्यक्ष चुने गए थे, चूँकि इस भूमिका को 18 मई 1966 की असमयिक मृत्यु के कारण नही निभा सके.

उनके कई शुभचिंतकों और छात्रों ने उनके नाम पर अपने नए निष्कर्षों का नाम देकर उनकी प्रशंसा की, जैसे कि पंचाननिया जयपुरेंसिस (कवक) और इसोइट्स पंचानानी आदि.

1965 में माहेश्वरी को रॉयल सोसाइटी (Fellow of the Royal Society) का फेलो चुना गया, वह इस सम्मान को अर्जित करने वाले दूसरे भारतीय वनस्पतिशास्त्री थे

सदस्यता | Membership

पंचानन माहेश्वरी दुनिया के मशहूर वैज्ञानिको में एक थे और कई अकादमियों ने उन्हें फाउंडेशन फेलो बनाकर सम्मानित महसूस किया. उन्हें निम्न संस्था से सदस्यता प्राप्त थी.

  • भारत के राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान, भारत [1956 – 1960]
  • इंडियन बॉटनिकल सोसाइटी, भारत
  • अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • अमेरिकन बॉटनिकल सोसायटी, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • भारतीय विज्ञान अकादमी, बैंगलोर [1934]
  • रॉयल सोसाइटी [1965]
  • इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ प्लांट मॉर्फोलॉजिस्ट [1950 – 1960]
  • भारतीय विज्ञान कांग्रेस संघ

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