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The Sacred Plant: Role and Importance on Indian Society

The Sacred Plant: Role and Importance on Indian Society

Sacred Plant अर्थात धार्मिक महत्व के पौधे! भारतीय संस्कृति के अंतर्गत मौजूद सभी धर्मो में पौधों का विशेष महत्त्व है. विभिन्न प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों में पौधों, फूलों व पत्तियों को होना नितांत आवश्यक है.

पौधों का धार्मिक कर्मकांड में शामिल करना वर्तमान ही नही वरन यह आदिकाल की प्रथा है. प्राचीन शिलालेखों में मिले भित्तचित्र से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि मनुष्य के समाजीकरण के साथ ही प्रकृति से जुड़े रहने के लिए पेड़-पौधों को विशेष दर्जा दिया जाने लगा.

लगभग हर पौधे का औषधीय महत्त्व है साथ ही साथ उनमे से अधिकांश पौधों का धार्मिक महत्व भी ज्ञात है. कई लेखकों, अनुसंधानकर्ताओं और धर्म विचारकों ने पौधों का सांस्कृतिक या धार्मिक जगहों पर उपयोग पर अपने-अपने मत प्रकट किया गया है.

धार्मिक महत्व के पौधे और समाज | Sacred Plant and Society

इस तारतम्य लोगों का नजरिया अलग-अलग होता है किन्तु इन सभी का वैचारिक मत एक मुख्य केंद्र बिंदु पर आ कर समाहित होता है जिस हम प्रकृति, परमात्मा, या महाशक्ति नाम दे सकते है. अर्थात यह कहा जा सकता है कि धार्मिक कर्मकाण्डो में Sacred Plant का उपयोग प्रकृति, परमात्मा, या महाशक्ति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए किया जाता है.

हालांकि हर क्रिया का वैज्ञानिक पहलु होता है इसलिए किसी भी एक पक्ष को इस परिपेक्ष्य में सही या गलत ठहराना उचित नही होगा. यह लेख लोगों में धार्मिक महत्त्व के पौधों के प्रति जागरूक करना तथा भारतीय संस्कृति में इनका महत्व प्रस्तुत करना मात्र है.

Most Popular Sacred Plant in India

1. बरगद | The Banyan Tree

“बरगद” भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है. श्रीमद्भगवत गीता में भी “बरगद” वृक्ष का उल्लेख मिलता है. भारतीय संस्कृति में विशेषकर हिन्दू धर्म में इसका विशेष दर्जा प्राप्त है. लगभग हर धार्मिक स्थल या मंदिर के आस-पास इनकी उपस्थिति निश्चित है.

अक्सर इस पेड़ के नीचे ही देवी-देवताओं की प्रतिमा रखे हुए दिख जायेंगे. “बरगद” बहुत ही पवित्र [Sacred Plant] माना जाता है क्योंकि इसे भगवान श्रीकृष्णा का निवास स्थान कहा जाता है. कुछ विशेष अवसरों में इनकी पूजा भी की जाती है. विशालकाय होने के कारण यह घने छांव प्रदान करता है.

2. पीपल | The Bodhi Tree

पीपल का पेड़ हिंदू धर्म में एक विशेष महत्व है, इसे पेड़ों का राजा माना जाता है. कई जगहों पर Sacred Fig या Bodhi Tree भी कहा जाता है. भगवान बुद्ध ने पीपल के पेड़ के नीचे ही ध्यान लगाया था और ज्ञान प्राप्त किया था. हिंदू धर्म के साथ ही साथ बौद्ध धर्म में भी पीपल का बहुत महत्व है.

पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में भी इसका उपयोग अस्थमा, मधुमेह, दस्त, मिर्गी, गैस्ट्रिक समस्याओं, सूजन, संक्रमण, पीलिया और यौन विकारों के इलाज के लिए किया जाता है.

3. तुलसी | Holy Basil Sacred Plant

तुलसी  का पौधा प्रत्येक हिन्दू के घर में पाया जाता है. औषधीय गुणों से परिपूर्ण तुलसी का उल्लेख पौराणिक काल से मिलता है. एक किवदंती के अनुसार देवी वृंदा को भगवान कृष्ण ने उनके भक्तों जो उनसे मिलने आते थे की सेवा बतौर एक संरक्षक के रूप में करने के लिए कहा गया.

भगवान कृष्ण उनके सेवा भाव देख कर उस स्थान को वृंदावन नाम दिया गया साथ ही पवित्र तुलसी के पौधे के रूप में हर घर में पाए जाने का वरदान दिया और जहाँ भी यह पाई जाएगी वह पवित्र स्थान माना जायेगा.

ईसाई धर्म के अनुसार प्रभु यीशु का खून उनकी कब्र के पास गिर गया था वहां कुछ जड़ीबूटी उग आई है. तब से तुलसी को क्रॉस की पूजा के साथ जोड़ा गया है [Sacred Plant], खासकर ग्रेट लेंट के दौरान [Great Lent].

इसका उपयोग कीट के काटने, गाउट, मांसपेशियों में दर्द, गठिया, ब्रोंकाइटिस, खांसी, साइनसाइटिस, पेट फूलना,  ऐंठन, सर्दी, बुखार, फ्लू और अन्य संक्रामक रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है।


Sacred plant
Image Credit: pxfuel.com

4. चंदन | Sandalwood

चंदन वृक्ष की पूजा नहीं की जाती है, बल्कि इस पवित्र लकड़ी का उपयोग पूजा अनुष्ठानों में किया जाता है. इसकी लकड़ी बहुत सुगंधित होती है. लकड़ी को पेस्ट में बदल दिया जाता है और फिर मूर्तियों को सजाने और भक्तों के माथे को चिह्नित करने के लिए उपयोग किया जाता है.

5. Coconut Tree | नारियल का पेड़

संस्कृत में, नारियल का नाम “कल्पवृक्ष” है, जिसका अर्थ है “वह वृक्ष जो जीवन की सभी आवश्यकताएं प्रदान करता है” या “इच्छा-पूर्ति करने वाला वृक्ष”. अधिकांश हिंदू घरों में नारियल के पेड़ को एक विशेष स्थान दिया जाता है और इस पेड़ का बहुत ध्यान रखा जाता है।

दक्षिण भारत में नारियल [Sacred Plant] के पेड़ लगाना हर घर के लिए जरूरी है। नारियल का उपयोग सभी धार्मिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है. किसी भी घटना की शुरुआत में एक नारियल को तोड़ना बहुत शुभ माना जाता है.

6. बेल | Bael Tree

बेल के पेड़ को बहुत पवित्र [Sacred Plant] माना जाता है क्योंकि यह भगवान शिव से सीधे जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि बेल-पत्र [Leaves] भगवान शिव को अर्पित करने से प्रसन्न होते हैं.

जैन धर्म में बेल को पवित्र माना जाता है. यह कहा जाता है कि 23 वें तीर्थंकर, भगवान पारसनाथजी ने एक बेल के पेड़ के नीचे “निर्वाण” ज्ञान प्राप्त किया. इन धार्मिक महत्वों के अलावा, पेड़ के लगभग सभी हिस्सों में औषधीय गुण होते हैं. बेल कई आयुर्वेदिक और सिद्ध योगों में एक घटक है.


Sacred plant Bael
Image Credit: Asit K. Ghosh

7. नीम का पेड़ | Sacred Plant: Neem

विभिन्न औषधीय लाभों के अलावा नीम का पेड़ हिंदुओं के बीच एक अत्यधिक पूजनीय वृक्ष है क्योंकि यह “देवी दुर्गा” की अभिव्यक्ति है. इसीलिए पेड़ को कभी-कभी नीमरी देवी भी कहा जाता है. पुरानी मान्यतानुसार नीम का उपयोग भुत-प्रेतों को भागने तथा छूत की बीमारी जैसे चेचक के उपचार के लिए किया जाता है.

8. अशोक | Ashoka Tree

सदाबहार वृक्ष ‘अशोक’ में सुंदर और सुगंधित लाल और पीले फूल होते हैं. इसे हिंदू धर्म, बौद्ध और जैन धर्म में एक पवित्र वृक्ष माना जाता है. यह पेड़ भारत के हर महल के बगीचे का प्रमुख घटक है. साथ ही बहुत सारे मंदिरों और बौद्ध मठों में यक्ष का प्रतीक है.

9. गाँजा | Marijuana

इसे मारिजुआना, भांग, और गांजा के नाम से जाना जाता है. बाइबिल में उल्लिखित जीवन का पेड़ भांग पौधा ही है और इसका उपयोग पवित्र माना गया है. उदाहरण के लिए, प्रकाशितवाक्य 22: 2 में कहा गया है, ‘जड़ी-बूटी राष्ट्रों का उपचार है।’

10. कमल का फूल | Sacred Plant: Lotus Flower

कमल का फूल शिक्षित समाज के लिए, अर्थ और कथा की परतों को उजागर करता है. हिंदुओं के लिए, सुंदर और शुद्धता का प्रतिक कमल का फूल जीवन का प्रतिनिधित्व करता है.

आध्यात्मिक तर्कों के अनुसार कमल भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न हुआ, जिसमें ब्रह्मा फूल के केंद्र में बैठे थे. हिंदू धर्म यह भी मानता है कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर पवित्र और शुद्धता स्वरूप कमल की आत्मा है.

निष्कर्ष | Conclusion

भारतीय क्षेत्र में पाए जाने वाले लगभग हर धर्म और समुदाय वर्ग के द्वारा प्रकृति और वातावरण के प्रति विशेष जुड़ाव देखा गया है. हर वर्ग के द्वारा पेड़-पौधों के प्रति विशेष आस्था समय-समय पर देखा जा सकता है. 

धार्मिक कर्मकांडों व पूजा संस्कारों में पेड़-पौधों, फूलों और पत्तियों के बिना संपन्न होना लगभग असंभव है. प्रत्येक पेड़ पौधे औषधीय महत्त्व के होते है और जाने-अनजाने हम सभी इनका उपयोग दैनिक दिनचर्या में अवश्य ही करते है. 

इसलिए हम यह कह सकते है कि प्रकृति या पेड़-पौधे ही सर्वोपरि है. यह धर्म, समुदाय, जाति व भौगोलिक सीमा से परे है. प्रकृति पर सभी जीवों का सामान अधिकार है. हम सभी को प्रकृति सहेजने के लिए मिलकर प्रयास करना चाहिए. 

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