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Traditional drink salfi: The Bastar Beer

Traditional drink salfi: The Bastar Beer

सल्फी का वानस्पतिक नाम करिओटा उरेन्स [Caryota urens] है जो अरेकेसी परिवार से संबंधित है. Salfi उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला यह वृक्ष विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे: श्रीताल, बन खजूर, भेरली माड़, माड़ी, सुरमाड, फिशटेल पाम, जागेरी पाम, ताड़ी पाम, ताड़ी आदि.

यह एक सदाबहार पाम का पेड़ है जो लगभग 20 मीटर तक ऊँची होती है। इसका तना सीधा, बिना फैला हुआ लगभग 30 सेंटीमीटर व्यास का होता है जिसमें सुंदर रूप से घुमावदार रिंग बनाते हुए लगभग 6 मीटर तक लंबा तना होता है. इसी में पत्तियों लगी होती है.

व्यावसायिक रूप से सल्फी का उपयोग गुड़, चीनी, पारम्परिक पेय और फाइबर बनाने के लिए किया जाता है. बगीचे में अक्सर इसे सजावटी पौधे के रूप में भी उगाया जाता है.

क्षेत्र एवं प्रसार | Area and Distribution of Salfi

Salfi पुरे भारत में निम्न भौगोलिक क्षेत्रों में पाई जाती है:

  • ऐसे पौधे नम उष्णकटिबंधीय जलवायु में आसानी से उग जाते हैं, जहां तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे कभी नहीं गिरता है. 
  • जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 1,500 मिमी या अधिक होती है और सबसे शुष्क महीने में भी 25 मिमी या अधिक वर्षा होती है Salfi के लिए उत्तम माना गया है.
  • इसके अलावा गर्म समशीतोष्ण क्षेत्रों और सूखे क्षेत्रों में भी 250 मिमी वार्षिक वर्षा के साथ और एक महीने या उससे अधिक तक 25 मिमी से कम वर्षा होती है वहां भी सफलतापूर्वक उगाये जा सकते हैं.
  • करिओटा उरेन्स धीमी गति से बढ़ने वाला पौधा है. मृदा pH 6 -7.5 अच्छी मानी गई है यह न्यूनतम मृदा pH 5.5 तक सहन कर सकता है.
  • सबसे महत्वपूर्ण, सल्फी एक मोनोकार्पिक प्रजाति, कई सालों तक बिना फूल के रहती है, लेकिन फिर एक बार फूल आने के बाद स्वतः ही मर जाती है.
  • यह लगभग 10 – 15 वर्षों में पूर्ण आकार प्राप्त करता है, और फिर 5 या अधिक वर्षों के लिए इनमें फूल आता है इसके पश्चात् यह पौधा मर जाता है.
  • इन पेड़ों में फूल आने शुरु होते ही इसे रस की पैदावार के लिए तैयार माना जाता है. जिसके बाद इनमें टैपिंग करके मीठा रस निकला जाता है.

सल्फी का स्थानीय उपयोग | Uses of Salfi

स्थानीय लोगों के अनुसार Salfi को निम्न उपयोग में लिया जाता है…

  1. पेड़ से प्राप्त रस का उपयोग स्थानीय समुदायों द्वारा चीनी या गुड़ बनाया जाता है. इस रस को किसुल शहद भी कहा जाता है. इसे विभिन्न जगहों पर  अलग-अलग नामों से जाना जाता है.
  2. प्राप्त रस को चौड़े मुंह वाले पात्र में आग में पका कर गाड़ा जाता है जिससे एक स्वादिष्ट, चिपचिपा, सुनहरा रंग का सिरप प्राप्त होता है. इसे ही ठंडा करके गुड़ प्राप्त किया जाता है जिसे किटुल गुड़ (किटुल कैंडी) कहते है.
  3. साबूदाना बनाने के लिए salfi के तने से प्राप्त स्टार्च का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह पौधा भोजन की कमी के समय तने में स्टार्च संगृहीत करके रखता है इसलिए इसके तने में स्टार्च भरपूर मात्रा में पाया जाता है.
  4. अक्सर इसे ताजे रूप में सेवन किया जाता है. यदि इसे कुछ घंटों के लिए धुप में रख दिया जाए तो स्वतः ही किण्वित हो जाती है. कई जगहों पर इसे किण्वित करने के लिए रस को धीमी आंच में कुछ समय के लिए पकाया जाता है.
  5. इसके बीजों को सुपारी (एरेका कटेचू) के स्थान पर उपयोग किया जा सकता है.

Salfi tree

सल्फी का औषधीय महत्व | Medicinal uses of Salfi

गांवों में होने वाले पारम्परिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार सल्फी का निम्न उल्लेख मिलता है:

  • बीज से तैयार दलिया को पारंपरिक चिकित्सकों द्वारा गैस्ट्रिक अल्सर, माइग्रेन सिरदर्द, सांप-काटने के जहर और सूजन के इलाज के लिए सिफारिश की जाती है.
  • ताजे Salfi  रस के सेवन से आंतो की सफाई होती है और पाचन क्रिया में सुधार होता है.
  • पथरी की इलाज के लिए भी ताजे Salfi रस लाभकारी माना जाता है.
  • दांत की बीमारियों के इलाज के लिए करिओटा उरेन्स की जड़ का उपयोग किया जाता है.
  • छाल और बीज का उपयोग फोड़े के इलाज के लिए किया जाता है.
  • ऊपरी नये फूलों का उपयोग बालों के विकास के लिए अच्छा माना जाता है.

सल्फी का पोषकता मान | Nutrient value

सल्फी रस | Palm sap

प्रति 100 मि.ली. सल्फी रस में निम्न पोषक तत्व पाए जाते है…

कार्बोहाइड्रेट – 1.8 ग्रा.

उर्जा – 3.8 कि. कैलोरी

नमी – 97.6 प्रतिशत

प्रोटीन – 0.1 ग्रा.

वसा – 0.3 ग्रा.

खनिज – 0.2 ग्रा.

सल्फी गुड़ | Palm gur

प्रति 100 ग्राम गुड़ में निम्न पोषक तत्व पाए जाते है…

प्रोटीन – 1.04 प्रतिशत

वसा – 0.19 प्रतिशत

सुक्रोज – 76.86 प्रतिशत

ग्लूकोज – 1.66 प्रतिशत

कैल्शियम – 0.816 प्रतिशत

फॉस्फोरस – 0.052 प्रतिशत

खनिज – 3.15 प्रतिशत

'बस्तर बीयर' उपनाम | The 'Bastar Beer' Pen-Name

Salfi

छत्तीसगढ़ राज्य का बस्तर संभाग जैव विविधता से परिपूर्ण है. यहाँ की जलवायु में कई प्रकार के विलुप्तप्राय जीव-जंतु के साथ-साथ पेड़-पौधे पाए जाते है. इस संभाग में केरिओटा उरेन्स जैसे पाम की प्रजातियों के लिए उपरोक्त बताये गए जलवायु पुर्णतः अनुकूल है.

यही कारण है कि सल्फी पुरे बस्तर में बहुतायत मात्रा में पाई जाती है. यहाँ के स्थानीय निवासियों द्वारा सल्फी रस का उपयोग बड़े शौक से स्थानीय पेय के रूप में किया जाता है.

विशेष अवसरों जैसे धार्मिक कर्मकांड में सल्फी रस का विशेष महत्त्व है. यहाँ इस रस को अपने आराध्य देवों को पूजा स्वरुप अर्पित किया जाता है.

मेहमानों के सत्कार में सल्फी रस का सेवन कराया जाता है. बस्तर की इसी संस्कृति के वजह से सल्फी को विशेष ख्यातिप्राप्त है. इन्ही कारणों से सल्फी को ‘बस्तर बीयर’ उपनाम से जाना जाता है.

व्यापारिक महत्त्व | Commercial aspect

व्यवसायिक दृष्टिकोण से देखे तो एक पूर्ण विकसित सल्फी वृक्ष से पेय और चीनी के लिए दैनिक उपज 25 30 लीटर रस / प्रति पेड़ होती है.

इस प्रकार एक वर्ष में प्रति सल्फी वृक्ष से लगभग 150 ली. ताज़ा रस, लगभग 2 कि. ग्रा. रेशे [जिसमें छाल और पत्तियां शामिल है] प्राप्त होती है, जिससे लगभग 22-25 कि.ग्रा. गुड़, दो बास्केट, दो ब्रश और 4-6 चटाई बनाई जा सकती है.

निष्कर्ष | Conclusion

कुछ लोगों में सल्फी को लेकर भ्रांति है कि यह एक शराब है. यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि इसे प्राकृतिक तरीके से पौधों से प्राप्त किया जाता है. जो किसी भी हानिकारक रसायनों से मुक्त होती है. इसके सेवन से शरीर को कई लाभ प्राप्त होता है इसलिए इसे शराब की संज्ञा देना उचित नही होगा.

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