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The Ayurveda: Myths and Facts

The Ayurveda: Myths and Facts

आयुर्वेद (Ayurveda) भारत ही नही बल्कि विश्व की एक व्यापक वैज्ञानिक औषधीय प्रणाली है. Ayurveda शब्द का अर्थ है जीवन का ज्ञान, जिसमें दो संस्कृत शब्द हैं, आयु (जीवन) और वेद (ज्ञान या विज्ञान). आयुर्वेद रोगों के प्राकृतिक उपचार एवं औषधियों के बारे में जानकारी संग्रहित वेद है.

विश्व स्वास्थ्य संघठन [World Health Organization | WHO] के अनुसार विश्व के 80% लोग आज भी Traditional Medicine System के द्वारा रोगों के treatment को प्राथमिकता देते है.  पिछले कुछ दशकों में Ayurveda का चलन बढ़ा है जिस कारण इस field में Research Activity तेज़ी से बढ़ रही है. इन सब Research के बावजूद लोगों में आज भी आयुर्वेद से जुड़ी कई भ्रम खुद ही पाल लेते है और इन सब अवैज्ञानिक (Unscientific) बातों को विश्वास से मानते भी है.

यहाँ हम लोगों के गलत अवधारणा को वैज्ञानिक तथ्य (Scientific facts) के माध्यम से आपके सामने रखने वाले है जिससे आयुर्वेद को विशुध्द (Pure form) रूप में अपनाया जा सके.

1. मिथक

आयुर्वेद (Ayurveda) के कई रूप है…!

तथ्य

बहुत से लोग सोचते हैं कि आयुर्वेद कई तरह के होते हैं और उनके अलग-अलग रूप हैं। Ayurveda कई रूपों में मौजूद नहीं है. यह प्राचीनकाल से लेकर अब तक हमेशा से ही विशुद्ध रूप से एक ही रूप में मौजूद है.

2. मिथक

आयुर्वेद में इलाज काफी धीमें गति से होता है

तथ्य

ऐसा बिलकुल नही है आयुर्वेद में भी ऐसी दवाएं मौजूद है जिससे इलाज तेजी से होती है. 

ऐलोपैथिक दवाएं (Allopathic medicine) आमतौर पर लक्षणों (symptoms) का इलाज करती हैं न कि बीमारी (disease) का. आयुर्वेद रोग के मूल कारणों (Root Cause) का निदान करता है और उन्हें सदा के लिए ख़त्म करने की कोशिश करता है. इस तरह के health problems के treatment time थोड़ा समय लेने वाली प्रक्रिया होती है.

3. मिथक

आयुर्वेद (Ayurveda) एक साइड इफेक्ट फ्री इलाज है

तथ्य​

अन्य दवाओं की तरह ही आयुर्वेद की दवाएँ भी अगर बिना Prescription के और बिना सही निदान के सेवन किया जाए तो  एसिडिटी (Acidity), दर्द (Pain), बेहोशी (Unconsciousness) आदि जैसे दुष्प्रभाव पैदा कर सकती हैं. वांछित उपचार (Effective treatment) के लिए इन दवाओं का उचित खुराक [Prescribed doses] में ही सेवन किया जाना है। 

4. मिथक

आयुर्वेदिक दवाएं का निर्माण घर पर होता और लैब परीक्षण की कमी होती है…!

तथ्य​

यह गलत concept है कि आयुर्वेदिक दवाएं घर पर ही बनायीं जाती है. प्रत्येक दवा जो सार्वजनिक रूप खरीदी व बिक्री की जाती है, चाहे एलोपैथिक हो या आयुर्वेदिक, उसे सावधानीपूर्वक प्रयोगशाला परीक्षणों (Lab test) और प्रमाणन प्रक्रिया Certification process से गुजरना ही पड़ता है। 

हर दृष्तटिकोण से आयुर्वेद, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध (scientifically proved) और विज्ञान समर्थित चिकित्सा पद्धति (Science based medically supported) तथा आधुनिक विज्ञान (Modern Science) के अनुरूप है।

5. मिथक

Ayurveda (आयुर्वेद )केवल जड़ी बूटियों बारे में है…!

तथ्य

कुछ हद तक हम कह सकते है किन्तु यह पुर्णतः सत्य नहीं है. Ayurveda को हर्बल treatment practices के रूप में जाना जाता है. 

आयुर्वेद में दूध (Milk), घी (Ghee), मक्खन (Butter), शहद (Honey), गुड़ (Jaggary), गिंगेली तेल (Gingelly), सेंधा नमक (Rock salt), खनिज (Minerals), राख (Ash) और स्व-किण्वित शराब (Fermented wine) का उपयोग आम है.

6. मिथक

आयुर्वेद (Ayurveda) “संयोगात्मक” दवा है..!

तथ्य

यह मात्र संयोग के बारे में नहीं है, आयुर्वेद किसी भी अन्य दवाओं की तुलना में अधिक वैज्ञानिक (More scientific) है।

वास्तविकता यह है कि कई आयुर्वेदिक अवधारणाएं (Concepts) वैज्ञानिक विश्लेषण (scientific analysis) की पहुंच से परे हैं। आयुर्वेद की मूल बातें अन्य चिकित्सा प्रणालियों से पूरी तरह से अलग हैं और स्वाभाविक रूप से इसकी उपचार पद्धति भी प्राचीन बुनियादी बातों पर निर्भर करता है.


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Image Credit: pixabay.com

7. मिथक

आयुर्वेदिक दवाओं  की समाप्ति अवधि नहीं होती है…!

तथ्य

हर चीज की एक समाप्ति अवधि (Expiry Date) होती है। कुछ जल्दी समाप्त होता है और कुछ देर से पर होता जरुर है. 

प्राचीन संदर्भ के अनुसार कुछ दवाओं का वैधता तिथि नहीं होती है। कुछ दवाएं वक्त के साथ बेहतर हो जाती हैं और पुराने होने के साथ-साथ प्रभावशाली उपचार गुण (Effective treatment property) प्राप्त करते हैं। लेकिन तथ्य यह है कि अधिकांश दवाओं का समय समाप्त (Date Expire) होता है।

8. मिथक

पारंपरिक चिकित्सक आयुर्वेदिक चिकित्सक’ हैं?

तथ्य

पारंपरिक चिकित्सकों (Traditional Healers) के द्वारा कुछ बीमारियों का इलाज करने के लिए वंशानुगत ज्ञान का उपयोग किया जा रहा है जो उन्हें पारिवार के बुजुर्गों से प्राप्त हुआ है. इनमें उपयोग की जाने वाली दवाओं या जड़ी-बूटियों को गुप्त (Secret) रखा जाता है।

Traditional Healers प्रशिक्षित Ayurvedic Doctors से काफी भिन्न होते हैं, हालांकि वे दोनों जो ज्ञान रखते है और जिस तरह से Practice करते रहे हैं, वह लगभग समान दिखता है.

9. मिथक

आयुर्वेदिक दवाओं को खुद से भी ले सकते है…

तथ्य

एक योग्य चिकित्सक द्वारा निर्धारित (prescribed) किए बिना ली गई कोई भी दवा जहर के बराबर होती है। कोई भी दवा सार्वभौमिक (Universal) नहीं है और सब कुछ सभी के लिए उपयुक्त नहीं होती है। 

जो दवा किसी व्यक्ति को अच्छी राहत प्रदान करती है वह किसी अन्य पर प्रतिकुल या घातक हो सकती है। यह नियम Ayurvedic Medicine पर भी लागू होती है.

10. मिथक

आयुर्वेदिक इलाज के दौरान आयुर्वेदिक डॉक्टर खाने से संबंधित परहेजों के लिए सख्त होते हैं

तथ्य

वे खाद्य पदार्थों से दूर रखने में आपकी मदद कर सकते हैं जो स्वास्थ के दृष्टिकोण से नुकसान पहुंचा सकते हैं और स्वास्थ्य गड़बड़ी का कारण बन सकते हैं या किसी मौजूदा बीमारी को बढ़ा सकते हैं।

11. मिथक

आयुर्वेदिक दवाएं कड़वी और ख़राब स्वाद की होती हैं…!

तथ्य

सबसे महत्वपूर्ण क्या है? स्वास्थ्य या दवा का स्वाद?

सभी आयुर्वेदिक दवा कड़वी (Bitter) या कसैले (Astringent) नहीं होती हैं। उनमें से कुछ में कड़वा स्वाद होता है और कुछ हर्बल सामग्री (Herbal Ingredient) के कारण स्वादिष्ट नहीं होते हैं। Ayurvedic medicine का स्वाद विभिन्न जड़ी-बूटियों के संयोजन पर भी निर्भर करता है।

12. मिथक

आयुर्वेदिक चिकित्सा से शरीर की गर्मी बढ़ती है !!!

तथ्य

इस विषय के जानकारों की माने तो आयुर्वेदिक दवा न तो शरीर में गर्मी बढ़ाती है और न ही सर्दी, न ही इनकी कमी होती है।

आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार, शरीर के कार्यों को ठंड (वात और कफ) और गर्म (पित्त) कारकों (तत्वों) के बीच संतुलन द्वारा नियंत्रित करके बनाए रखा जाता है. 

जब इन कारकों के बीच एक आनुपातिक असंतुलन होता है, तो शरीर के physiology के संतुलन और लय में गड़बड़ी होती है जो आगे विभिन्न रोगों के प्रकट होने के लिए एक मंच निर्धारित कर देती है।

Conclusion

आयुर्वेद सबसे अच्छा Time-tested medical science है जो रोगग्रस्त मानव जाति की सेवा में उपलब्ध है. बस सब मिथकों (Myths) को छोड़ दें और सिर्फ तथ्यों पर ध्यान दें.

न केवल स्वस्थ अपितु बीमार व्यक्तियों के लिए भी उपयोगी विज्ञान है आयुर्वेदइसलिए यह समग्र और व्यापक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली (Holistic and comprehensive health care system) के रूप में आज भी खड़ा है.

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