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Traditional Medicine System:  The Global Prospects

Traditional Medicine System: The Global Prospects

पारंपरिक चिकित्सा (Traditional medicine; TM) स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा और जिसे अक्सर वास्तविकता से कमतर आँका जाता है. कुछ देशों में, Traditional medicine या Non-Conventional medicine को पूरक चिकित्सा (Complementary medicine; CM) कहा जाता है। 

TM का एक लंबा इतिहास रहा है जो प्राचीन समय में स्वास्थ्य देखभाल के साथ रोग निवारण और उपचार से संबंधित है.

दुनिया के कई हिस्सों में, नीति-निर्माता, स्वास्थ्य पेशेवर और आम जनता Traditional और Complimentary medicine (T & CM) की सुरक्षा, प्रभावशीलता, गुणवत्ता, उपलब्धता, संरक्षण और विनियमन जैसे मुद्दों के लिए अभी भी अघोषित जंग लड़ रही हैं

Traditional Medicine

ज्ञान, कौशल और प्रथायें Traditional medicine का आधार है, जो विभिन्न प्राचीन संस्कृतियों के द्वारा शारीरिक और मानसिक बीमारियों के देखभाल के साथ-साथ रोकथाम, निदान, सुधार या उपचार में उपयोग किए जाने वाले सिद्धांतों, विश्वासों और अनुभवों पर आधारित है। 

Complementary Medicine

Complementary medicine या ‘Alternative medicine’ स्वास्थ्य देखभाल की एक व्यापक समूह से संबंधित है. यह उस देश की पारंपरिक चिकित्सा का हिस्सा नहीं होती हैं जहाँ यह पायी जाती है. इस प्रकार की चिकित्सा पद्धति पूरी तरह से प्रमुख स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में एकीकृत भी नहीं होती हैं। यह कुछ देशों में पारंपरिक चिकित्सा के साथ परस्पर उपयोग किए जाते हैं।

Strategies of Traditional Medicine

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ही एकमात्र संस्था है जो वैश्विक स्तर पर Traditional Medicine के लिए आवश्यक रणनीति तैयार करती है. इसे सभी सदस्य देश सर्वसमहति से मानते है.

WHO के द्वारा Traditional Medicine (TM) रणनीति [Traditional Medicine (WHA62.13)] 2014-2023 पारित किया गया. इस रणनीति के लक्ष्यों का सदस्य देशों द्वारा समर्थन किया गया हैं जिनमें निम्न बातें उल्लेखित है:

  1. लोगों को स्वास्थ्य देखभाल पर आधारित स्वास्थ्य और कल्याण के लिए TM के संभावित क्षमताओं का उपयोग
  2. विनियमन और शोध के द्वारा TM के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना
  3. जहां उपयुक्त हो TM उत्पादों, चिकित्सकों और चिकित्सकीय अभ्यासों को स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत करना.

Objectives of Traditional Medicine System

रणनीति बनाने का मुख्य उद्देश्य ऐसी सक्रिय नीतियों का विकास करना है जो आम लोगों को स्वस्थ रखने में TM की भूमिका को मजबूत बनाती हो. साथ ही इस कार्य योजनाओं को लागू करने वाले सदस्य राज्यों का समर्थन कर सके.

विश्व स्तर पर और सदस्य राज्यों में TM की स्थिति की समीक्षा के लिए उद्देश्य स्वरुप चार प्रमुख बिंदु निर्धारित किए:

  1. नीति (Policy) – राष्ट्रीय स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के भीतर TM को एकीकृत करना, जहां राष्ट्रीय TM नीतियों और कार्यक्रमों को विकसित और कार्यान्वित करना संभव है।
  2. सुरक्षा, प्रभावकारिता और गुणवत्ता (Safety, efficacy and quality) – पारंपरिक ज्ञान के आधार का विस्तार करके नियामक और गुणवत्ता मानकों पर मार्गदर्शन प्रदान करके TM की सुरक्षा, प्रभावकारिता और गुणवत्ता को बढ़ावा देना.
  3. पहुंच सुलभ (Easy to Access) – TM की उपलब्धता और उपयोग सामर्थ्य में वृद्धि के साथ विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर आबादी के लिए उपयोग पर जोर देना.
  4. तर्कसंगत उपयोग (Rational use) – चिकित्सकों और उपभोक्ताओं द्वारा TM के चिकित्सीय रूप के उपयोग को उचित बढ़ावा देना.

Main Challenges

दुनिया भर में इस रणनीति को लागू करने और कुछ महत्वपूर्ण सफलता मिलने के बावजूद, Member States को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जैसे:

  • नीति और नियमों का विकास और प्रवर्तन;
  • एकीकरण, विशेष रूप से TM को राष्ट्रीय और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (PHC) में एकीकृत करने के लिए रणनीतियों और मानदंडों की पहचान और मूल्यांकन;
  • सुरक्षा और गुणवत्ता, विशेष रूप से उत्पादों और सेवाओं का मूल्यांकन, चिकित्सकों की योग्यता, प्रभावकारिता का मूल्यांकन करने के लिए कार्यप्रणाली और मानदंड;
  • T & CM के विज्ञापन और दावों को नियंत्रित और विनियमित करने की क्षमता;
  • अनुसंधान और विकास;
  • T & CM जुड़े चिकित्सकों की शिक्षा और प्रशिक्षण;
  • सूचना और संचार, जैसे T & CM से जुड़ी जानकारी, नीतियों, विनियमों, सेवा प्रोफाइल और अनुसंधान परिणाम आदि साझा करना.

Traditional-Medicine-system

Education system for TM practitioners in India

भारत में, आधिकारिक रूप से 6 पारंपरिक चिकित्सा शिक्षा को मान्यता प्राप्त है जिनमे आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी चिकित्सा, सिद्ध और होम्योपैथी शामिल है.

2013 में WHO द्वारा भारत में किये गए सुर्वे अनुसार पारंपरिक चिकित्सा शिक्षा  से जुड़े 508 महाविद्यालय हैं  जिनमे 258 स्नातक छात्रों का वार्षिक प्रवेश होता है. इनमें से 117 महाविद्यालय में 2493 स्नातकोत्तर छात्रों को भी प्रवेश दिया जाता हैं।

इन महाविद्यालय को केवल केंद्र सरकार की अनुमति और उनके बुनियादी ढांचे, पाठ्यक्रम और पाठ्यक्रम की पूर्व स्वीकृति के साथ स्थापित किया जाता है।

वार्षिक और औचक निरीक्षण यह सुनिश्चित करते हैं कि शैक्षिक और अवसंरचना मानकों को पूरा किया जाता है या नही.

International Regulatory Cooperation for Herbal Medicines [IRCH]

हाल के वर्षों में, औषधीय उत्पादों को विनियमित करने के लिए क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। 1986 के बाद से दवा नियामक प्राधिकरणों के अंतर्राष्ट्रीय कौंसिल (ICDRA) की बैठकों में हर्बल आधारित दवाये एक विशिष्ट विषय रहा है.

T & CM के क्षेत्र में, International Regulatory Cooperation on Herbal Medicine (IRCH) के प्रमुख अंग के रूप में हर्बल दवाओं के विनियमन के लिए जिम्मेदार राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण, 2006 से वैश्विक स्तर पर सालाना बैठक आयोजित करती है.  

Conclusion

Traditional medicine का प्राचीन गौरवशाली इतिहास रहा है जिसे विश्व के बहुत से देश इसे आज भी अपने स्तर पर उपयोग कर रहे है. आधुनिक चिकित्सा पद्धति के कारण अवश्य ही TM की उपयोगिता पर कुछ सवाल खड़े किये है किन्तु यह आज भी उतनी ही कारगर है जितनी पहले थी. TM और इसके साख को पुनर्जीवित करने के लिए WHO परस्पर प्रयत्नशील है. 

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