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Black Rice: An Ultimate Staple Food of Manipur, India

Black Rice: An Ultimate Staple Food of Manipur, India

अब तक चांवल की 40,000 से भी अधिक किस्मों की पहचान की जा चुकी है जिसमे Black Rice भी एक है. ब्लैक राइस की खेती मुख्य रूप से एशियाई देशों में की जाती है. इसका वानस्पतिक नाम Oryza staive L indica है.

इसमें पाए जाने वाले ‘एंथोसायनिन’ नामक पिगमेंट के कारण यह काले रंग का होता है यह पिगमेंट ब्लूबेरी और ब्लैकबेरी जैसे फलों में पाया जाता है जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में जाना जाता है.

इसे Purple rice, Forbidden rice, Heaven rice, Imperial rice और King’s rice के रूप में भी जाना जाता है. साथ ही इसे कई रोगों के लिए रामबाण औषधि माना जाता है.

Black Rice की कीमत सामान्य सफेद चांवल से पांच से दस गुना महंगी है. फिर भी, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों में काले चांवल की मांग तेजी से बढ़ रही है क्योंकि इसका अपना स्वास्थ्यगत महत्त्व है और इसका रंग पूर्णतया प्राकृतिक जैविक खाद्य रंग होता है.

भौगोलिक विस्तार | Geographical Distribution

भारत, चीन और थाईलैंड जैसे दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में Black Rice की खेती का एक लंबा इतिहास रहा है. यह चीन और अन्य पूर्वी एशियाई देशों में प्राचीन काल से मौजूद एक प्रमुख अनाज की फसल है.

कोरिया, जापान और चीन में हजारों वर्षों से ब्लैक राइस का उपभोग करते आ रहे है. भारत में यह मिजोरम राज्य में प्रमुखता से उगाया जाता है. Black Rice के लिए इस राज्य को GI Tag भी प्राप्त है.

प्राचीन चीन में यह फसल बहुत सीमित मात्रा में उगाई जाती थी और केवल शाही और उच्च वर्ग के लोगों के लिए ही उपलब्ध कराई जाती थी. आम चीनी लोगों को ब्लैक राइस को उगाने या उपभोग करने की मनाही थी.

संयुक्त राज्य अमेरिका में Black Rice को सन् 1995 में पेश किया गया था. आज इस चांवल के लिए कोई प्रतिबन्ध नही है, लेकिन यह अभी भी अन्य प्रकार के चांवल की तुलना में अपेक्षाकृत कम मात्रा में उगाया जाता है.

वैश्विक उत्पादन | Global Production of Black Rice

दुनियाभर में 200 से भी अधिक प्रकार के Black Rice की किस्में मौजूद हैं. इस चांवल के कुल वैश्विक उत्पादन में 62% उत्पादन चीन के द्वारा किया जाता है. यह अब तक 54 से अधिक ब्लैक राइस किस्मों को विकसित कर चूका है जो उच्च उपज क्षमता और कई प्रतिरोधक विशेषताओं से परिपूर्ण है.

श्रीलंका, इंडोनेशिया, भारत और फिलीपींस जैसे देश भी Black rice के प्रमुख उत्पादक हैं. किन्तु वर्तमान में अमेरिका, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों में व्यावसायिक पैमाने पर ब्लैक राइस का उत्पादन नहीं बढ़ रहा है.

ब्लैक राइस के पोषक तत्व | Black Rice Nutrition Profile

प्रत्येक 100 ग्राम ब्लैक राइस में निम्नलिखित सूक्ष्म और गौण पोषक तत्व निहित होते है:

कैलोरी 356 kcal

  • गौण पोषक तत्व [Macro Nutrients]: कार्बोहाइड्रेट 75.6 ग्राम, फाइबर 2.2 ग्राम, चीनी/शुगर 0.0 ग्राम, प्रोटीन 8.9 ग्राम, वसा 3.3 ग्राम.
  • सूक्ष्म पोषक तत्व [Micro Nutrients]
  1. विटामिन: विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, विटामिन डी, विटामिन ई.
  2. खनिज पदार्थ: कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटेशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर.

काले चांवल के लाभ | Health Benefits of Black Rice

1. सबसे अच्छा प्राकृतिक विश्लेषण | Black Rice Is an Ideal Natural Antioxidants

एंटीऑक्सीडेंट का एक समृद्ध स्रोत के रूप में बताया गया है. इन काले चांवल में ब्लूबेरी की तुलना में दो गुना तथा सफेद चांवल की तुलना में छह गुना अधिक एंटीऑक्सिडेंट गतिविधियों के पाई गई है. अमेरिकन केमिकल सोसाइटी [2010] की रिपोर्ट के अनुसार, एक चम्मच काले चांवल तथा ताजे ब्लूबेरी में एंथोसाइनिन की एक समान मात्रा मौजूद होती है.

2. मधुमेह में लाभकारी | Anti-Diabetics Properties on Black Rice

डायबिटीज के उपचार के लिए सबसे आशाजनक तरीकों में से एक Black rice के सेवन को माना जा सकता है. हाल के अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि एंथोसायनिन में अल्फा-ग्लूकोसिडेस और अल्फा-एमाइलेज सहित अन्य पाचन एंजाइमों के खिलाफ एक निरोधात्मक गतिविधि पाई गई थी.

यह भोजन करने के बाद स्टार्च के पाचन के दौरान ग्लूकोज स्तर में हुए वृद्धि को कम करने में मदद करती है.

3. खनिजों से भरपूर | Rich in Mineral

सफेद चांवल की तुलना में, काले चांवल Fe, Zn, Mn और P जैसे खनिज तत्वों से अपेक्षाकृत समृद्ध होते हैं. ज्ञात हो कि किसी भी खाद्य सामग्री में खनिज तत्व परिवर्तनशील होती है जो कि किस्मों और कृषित मिट्टी पर निर्भर करती है.

आयरन की प्रचुरता के कारण काले चावल, आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया रोग में विशेष रूप से फायदेमंद होती हैं.

4. ग्लूटेन-फ्री अनाज | Black Rice Is a Natural Gluten-Free Grain

यह अनुमान लगाया गया है कि प्रति 7 में से 1 व्यक्ति उदर विकार से पीड़ित है. Black Rice में प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन नहीं होता है. इसलिए ब्लैक राइस का सेवन करने से ज्यादातर लोगों के लिए ग्लूटेन के पाचन संबंधी समस्याएं दूर हो सकती हैं.

5. कैंसर रोधी गुण | Anti-Cancer Property

कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करता है इसमें उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट तत्व. शोध इस बात की पुष्टि करता है कि, काले चांवल के एंटीऑक्सिडेंट तत्व शरीर में प्रतिक्रियाशील मुक्त कणों को खत्म करते हैं और डीएनए को क्षति से बचाते है जो कैंसर का कारण बन सकता हैं.

6. कार्डियोवस्कुलर रोगों से बचाव | Help to Prevent from Cardiovascular Diseases

उपरोक्त तथ्यों से बताया गया है कि ब्लैक राइस में एंटीऑक्सिडेंट उचित मात्रा में होती है जो हृदय रोग के कम जोखिमों को कम कर सकता है. हाल के वर्षों में हुए अध्ययनों से पता चला है कि मानव में एंथोसायनिन पूरक आहार एलडीएल और एचडीएल में सुधार करता है.

7. वजन पर नियन्त्रण | Weight Controlled Diet

फाइबर से भरपूर और कैलोरी की मात्रा कम होने के कारण इसे डाइट प्लान में आसानी से शामिल किया जा सकता हैं. इसमें उपलब्ध आहार फाइबर पेट के खालीपन का एहसास देरी से कराता है जिससे बार-बार भोजन करने की इच्छा नही होती. फलस्वरूप वजन को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है.

8. आँखों और त्वचा के लिए | Protect Your Eyes and Skin

आँखों और त्वचा सम्बन्धी विकारों के लिए काले चांवल में एंथोसायनिन तत्व लाभकारी सिद्ध होता है. आँखों के इन विकारों में मुख्यतः मोतियाबिंद, धब्बेदार अध: पतन और विज़न समस्याएं शामिल हैं.

सूरज की रोशनी से त्वचा को होने वाले क्षति और उम्र बढ़ने के साथ त्वचा पर दिखने वाले प्रभाव को काले चांवल से प्राप्त एंटीऑक्सीडेंट से उचित मरम्मत किया जा सकता है.

ब्लैक राइस के साइड इफेक्ट्स | Side Effects of Black Rice

अब तक के रिसर्च में ऐसा कोई दुष्प्रभाव ज्ञात नहीं हुआ हैं. यह पोषक तत्वों से भरपूर, कम वसा, लंबे समय तक चलने वाले कार्बोहाइड्रेट का स्रोत और उत्तम स्वाद के लिए ही जाना जाता है.

ब्लैक राइस के अन्य तथ्य | Some Other Facts of Black Rice

  • काले चांवल [Black Rice] का रंग एक प्राकृतिक खाद्य रंग है.
  • “इंपीरियल चावल” और ” Forbidden rice” का अर्थ है कि ब्लैक चांवल केवल सम्राट या राजाओं के खाने के लिए आरक्षित था.
  • पारंपरिक चीनी चिकित्सा किवदंती के अनुसार भूरे बालों के खिलाफ को काले करने के लिए काले चांवल का इस्तेमाल किया जाता था.
  • सफेद चांवल की तुलना में काले चांवल को पकाने के लिए अधिक समय और अधिक पानी की आवश्यकता होती है.
  • इसे पकाने से पहले कम से कम एक घंटे के लिए पानी में भिगोने से चांवल उचित प्रकार से पकती है.
  • काले चांवल की शेल्फ लाइफ काफी कम होती है। इसलिए इसे तीन महीने के भीतर ही उपयोग या कोल्ड स्टोर में संग्रहीत किया जाना चाहिए.

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