Environmental issues
Organic Farming: An environmental issue towards a healthy world

Organic Farming: An environmental issue towards a healthy world

Organic farming एक ऐसी तकनीक है, जिसमें प्राकृतिक तरीको का उपयोग करके पौधों की खेती और जानवरों को पालना शामिल है.

इस प्रक्रिया में जैविक पदार्थों का उपयोग शामिल होता है, मिट्टी की उर्वरता और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के लिए सिंथेटिक पदार्थों की उपयोग की अनुशंसा नही की जाती है जिससे प्रदूषण और अपव्यय को कम किया जाता है.

जैविक खेती का इतिहास | History of Organic farming

सर अल्बर्ट हॉवर्ड, एफएच किंग, रुडोल्फ स्टेनर और अन्य लोगों द्वारा सन् 1900 के दशक की शुरुआत में जैविक कृषि की अवधारणाओं को विकसित किया गया था.

जो यह मानते थे कि पशु अपशिष्ट आधारित खाद के उपयोग, फसलों को कवर करने, फसल चक्रीकरण, और जैविक आधारित कीट-व्याधि नियंत्रण के परिणामस्वरूप एक बेहतर कृषि प्रणाली हो सकती है.

सर हावर्ड उन दिनों भारत में एक कृषि शोधकर्ता के रूप में काम कर रहे थे, उन्होंने अपने सामने आने वाली पारंपरिक और स्थायी खेती प्रथाओं से बहुत प्रेरणा प्राप्त की और पश्चिमी देशों में खेती के इन तरीकों को अपनाने की अनुशंसा भी की.

आगे इस तरह की प्रथाओं को विभिन्न लोगों ने आगे बढ़ाया जैसे- जे. आई. राडेल और उसके बाद उनके बेटे रॉबर्ट (1940). जिन्होंने ऑर्गेनिक गार्डनिंग और फार्मिंग पत्रिका प्रकाशित की साथ ही जैविक खेती के लिए कई शोध पत्रों का प्रकाशन किया.

रासेल कार्सन के द्वारा 1960 के दशक में साइलेंट स्प्रिंग के प्रकाशन से जैविक खाद्य की मांग को बढ़ावा मिला था, जिसमें कीटनाशकों से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान की मात्रा का आकलन किया गया था.

20 वीं सदी के अंत से आर्गेनिक फ़ूड के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा और इनकी बिक्री में लगातार वृद्धि दर्ज की गई.

अंतर्राष्ट्रीय विनियमन | International Regulation of Organic Farming

Jaivik Kheti को सरकारों द्वारा औपचारिक रूप से परिभाषित किया गया है. किसानों को अपनी उपज और उत्पादों को “जैविक उत्पाद” [Organic Products] के रूप में प्रमाणित किया जाना चाहिए.

इसके लिए फसलों, जानवरों और वन-आधारित उत्पादों के लिए साथ ही कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए विशिष्ट जैविक मानक हैं.

यूरोपीय संघ में, जैविक प्रमाणीकरण तथा निरीक्षण यूरोपीय संघ के जैविक नियंत्रण निकायों द्वारा किया जाता है.

अमेरिका में यह कार्य कृषि विभाग (USDA) के द्वारा सन् 2000 से किया जा रहा है. जहाँ देश भर में कई कृषि उत्पादों को जैविक प्रमाण पत्र दिया जा चूका हैं.

यद्यपि अधिकांश देशों के पास जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण के लिए अपने स्वयं के कार्यक्रम हैं, यूरोपीय संघ या संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रमाण पत्र अन्य देशों के उत्पादकों और प्रसस्करणकर्ताओं  का निरीक्षण और प्रमाणन कर सकती हैं.

यह विशेष रूप से तब उपयोगी होता है जब विभिन्न देशों में उत्पादों को व्यवस्थित रूप से उगाया जाता है, और संयुक्त राज्य को निर्यात किया जाता है.

जैविक खेती के तरीके | Organic Farming Methods

उर्वरक | Fertilizers

चूंकि सिंथेटिक उर्वरकों का उपयोग organic farming में नहीं किया जाता है, इसलिए कार्बनिक पदार्थों का मृदा में उचित उपलब्धता तथा उनका रखरखाव जैविक किसानों के लिए पहली प्राथमिकता होती है.

कार्बनिक पदार्थ जैसे- खाद, कम्पोस्ट और पशुओं से प्राप्त बाय-प्रोडक्ट जैसे- पक्षियों के पंख, भोजन, बिछावन इत्यादि के माध्यम से भूमि में दिया जा सकता है.

किट-व्याधी नियत्रण | Pest control

जैविक कीटनाशक प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले स्रोतों से प्राप्त होते हैं. इनमें बैक्टीरिया जैसे कि बेसिलस थुरिंजेंसिस [Bacillus thuringiensis] का उपयोग कैटरपिलर कीटों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है,

इसी तरह पादप जैसे, गुलदाउदी [Chrysanthemum cinerariifolium] के सूखे फूल या नीम के तेल [Azadirachta indica] का उपयोग कीटों के नियन्त्रण के लिए करते हैं. इस तरह खनिज आधारित अकार्बनिक कीटनाशक जैसे सल्फर और कॉपर के उपयोग की भी अनुमति है.

कीटनाशकों के अलावा, कीटों के नुकसान को कम करने के लिए जैविक कीट नियंत्रण जैसे, जैविक, कल्चरल और आनुवंशिक नियंत्रण आदि को एकीकृत करता है.

किट-व्याधी नियत्रण की जैविक विधि की विशाल श्रृंखला है. जिन्हें किसान Organic Farming में अपना कर लाभ ले सकते है.

Organic farming
Image by Isabel Perelló from Pixabay

भारतीय परिपेक्ष में ऑर्गनिक फार्मिंग | Organic Farming in Context of India

नेशनल सेंटर ऑफ़ ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग [NCOF], मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन घटक के अंतर्गत सतत कृषि और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक नोडल एजेंसी है.

यह एजेंसी INM डिवीज़न, कृषि विभाग, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन है.

NPOF, 2004 में अपने क्षेत्रीय केंद्रों, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, इम्फाल, जबलपुर, नागपुर और पंचकूला के साथ जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक यह राष्ट्रीय परियोजना के रूप में लागू हुआ.

तारीख 01.10.2004 (10 वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान) से यह पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 57.05 करोड़ रूपये के साथ शुरू हुआ. जिसे 11 वीं पंचवर्षीय योजना में 101.00 करोड़ रुपये कर दिया गया.

12 वीं पंचवर्षीय योजना में इस परियोजना को “सतत कृषि का राष्ट्रिय मिशन [NMSA]” के मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के तहत 293 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ विलय हुई.

वर्तमान में नेशनल सेंटर ऑफ ऑर्गेनिक फार्मिंग का हेड ऑफिस गाजियाबाद में स्थित है तथा अब इसके नौ  रीजनल सेंटर बन चुके है जिनमें, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, गांधीनगर, गाजियाबाद, इम्फाल, जबलपुर, नागपुर, पंचकुला और पटना में स्थित हैं.

इसके प्रमुख उद्देश्य | Objectives of NCOF

  • मानव संसाधन विकास सहित सभी हितधारकों की तकनीकी क्षमता निर्माण के माध्यम से देश में जैविक खेती को बढ़ावा देना.
  • प्रौद्योगिकी का प्रचार और प्रसार.
  • उर्वरक नियंत्रण आदेश [Fertilizer Control Order; FCO (1985)] के तहत जैव उर्वरकों का सांविधिक गुणवत्ता नियंत्रण.
  • जैविक प्रमाणीकरण के लिए कम लागत वाली भागीदारी गारेंटी प्रणाली-भारत [Participatory Guarantee system; PGS-India)] को बढ़ावा देना.
  • प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जागरूकता और प्रचार.

जैविक खेती के फायदे | Advantages of Organic Farming

  • किसान अपनी उत्पादन लागत को कम कर सकते हैं क्योंकि उन्हें महंगे रसायनों और उर्वरकों को खरीदने की आवश्यकता नहीं है.
  • किसान तथा फार्म श्रमिकों के स्वास्थ्य में सुधार.
  • जैविक खेती से ऊर्जा की बचत कर सकते हैं इससे पर्यावरण की रक्षा होगी.
  • यह ग्लोबल वार्मिंग की रफ़्तार को धीमा कर सकता है.
  • जैव विविधता में सुधार और स्थिरता.
  • भूजल तथा अन्य सतही जल स्त्रोतों का प्रदूषण रोका जाता है.

जैविक खेती के नुकसान | Disadvantages of Organic Farming

  • उत्पादन में कमी. किसानों को उनकी जमीन से उचित उत्पादन नहीं मिलता जितना पारंपरिक किसानों को मिलता है.
  • उत्पादन लागत अधिक है क्योंकि किसानों को अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है.
  • विपणन और वितरण कुशल नहीं है क्योंकि कम मात्रा में Organic food का उत्पादन होता है.
  • खाद्य सुरक्षा का उचित व्याख्या नही करती है जैविक खेती. क्योंकि इससे कम मात्रा में भोजन उपलब्ध होता है. यह उन देशों में भुखमरी का कारण बन सकती है जो आज पर्याप्त भोजन का उत्पादन करते हैं.
  • दुनिया के भोजन का लगभग 1-2% जैविक तरीकों से उत्पादित होता है.

Present Status of Organic Farming in India | भारत में जैविक खेती की वर्तमान स्थिति

भारत हमेशा से जैविक कृषि के क्षेत्र में अग्रणी रहा है. Organic farming उत्पादन मानकों पर आधारित है जो पर्यावरणीय रूप से सहायक हैं और सामाजिक, आर्थिक और पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ हैं.

वैश्विक खपत पैटर्न में बदलाव, उपभोक्ताओं के बीच स्वास्थ्य जागरूकता और स्थिरता का बढ़ता महत्व अब Organic Products को अंतरराष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ घरेलू बाजार में भी सबसे आगे रख रहा है.

172 देशों में से भारत जैविक कृषि का अभ्यास करने वाले एक अद्वितीय स्थान रखता है. आंकड़ों में नजर डाले तो भारत में 6,50,000 जैविक उत्पादक, 699 प्रोसेसर, 699 निर्यातक और 7,20,000 हेक्टेयर में खेती होती है.

भारत ने प्रमाणित जैविक उत्पादों के लगभग 1.35 मिलियन मीट्रिक टन (2015-16) का उत्पादन किया जिसमें खाद्य उत्पादों की सभी किस्में शामिल हैं.

उपलब्ध वैश्विक आँकड़े के अनुसार वर्ष 2015 में, 170 से अधिक देशों में भारत जैविक उत्पादकों की संख्या के मामले में पहले स्थान पर और जैविक कृषि क्षेत्र में नौवें स्थान पर रहा.

ठीक इसी तरह सन् 2015 में जैविक उत्पाद निर्यात में 11 वें स्थान पर था.

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